न्यूज डेस्क, 25 जुलाई 2026:
भारत के Private Space Sector ने शनिवार को इतिहास रच दिया। हैदराबाद की Space Startup Skyroot Aerospace का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 अपने पहले ही मिशन में सफल रहा। Mission Aagman के तहत लॉन्च किए गए इस रॉकेट ने कई ग्राहकों के Payload और वैज्ञानिक प्रयोगों को तय कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। इस उपलब्धि के साथ भारत अमेरिका और चीन के बाद ऐसा करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया, जहां किसी निजी कंपनी ने सफल ऑर्बिटल लॉन्च किया है।
श्रीहरिकोटा से भरी उड़ान, पहली कोशिश में मिली सफलता
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुए Vikram-1 ने करीब 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली कक्षा में अपने Payload स्थापित किए। खास बात यह रही कि रॉकेट ने पहली ही उड़ान में मिशन पूरा कर लिया। Space सेक्टर के जानकार इसे भारत के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि मान रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इस सफलता की तुलना SpaceX के Falcon-1 से की जा रही है, जिसे ऑर्बिट तक पहुंचने में चार प्रयास लगे थे। ऐसे में पहली कोशिश में Vikram-1 की सफलता ने भारतीय Space Startup Ecosystem का भरोसा और मजबूत किया है।
Space Economy को मिलेगा नया बूस्ट
भारत का लक्ष्य वर्ष 2033 तक अपनी Space Economy को करीब 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। माना जा रहा है कि Skyroot की यह सफलता इस लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। इससे निजी निवेश, नई टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है। कई दशकों तक भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में ISRO की प्रमुख भूमिका रही है। अब निजी कंपनियों के आने से Commercial Launch Market में भारत की मौजूदगी और मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।

अभी और लॉन्च के बाद बनेगा Commercial सिस्टम
Space Expert अजय लेले का कहना है कि यह उपलब्धि बेहद अहम है, लेकिन Vikram-1 को पूरी तरह Commercial Launcher के रूप में स्थापित करने के लिए एक-दो और सफल लॉन्च जरूरी होंगे। उनका मानना है कि लगातार सफल मिशन के बाद ही Skyroot वैश्विक बाजार में बड़े स्तर पर ग्राहकों को आकर्षित कर सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने Carbon Composite Material और 3D Printing जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है। इससे लॉन्च की लागत कम होगी, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है।
युवा टीम की मेहनत रंग लाई
Mission की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने Skyroot की टीम को बधाई दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मिशन को सफल बनाने वाली टीम की औसत उम्र करीब 28 वर्ष रही। Skyroot Aerospace के सह-संस्थापक और CEO पवन के चंदाना ने सोशल मीडिया पर कहा कि पहली ही कोशिश में Satellite को तय Orbit में पहुंचते देख Mission Control में अपनी खुशी रोक पाना मुश्किल था। उन्होंने 2018 में नागा भरत डाका के साथ मिलकर Skyroot Aerospace की शुरुआत की थी। दोनों पहले ISRO में वैज्ञानिक रह चुके हैं।






