
योगेंद्र मलिक
देहरादून, 31 जुलाई 2026ः
उत्तराखंड के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने संसद में उत्तराखंड की भौगोलिक विषमताओं, पलायन और सीमांत क्षेत्रों की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने वर्ष 2027 की जनगणना के लिए राज्य के लिए विशेष पर्वतीय मॉडल और अलग जनगणना नीति बनाने की मांग की। कहा कि उत्तराखंड में पारंपरिक जनगणना के बजाय ‘अपनी गणना–अपना गांव’ अभियान के रूप में जनभागीदारी आधारित व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए, जिससे राज्य की वास्तविक जनसंख्या और सामाजिक स्थिति का सही आकलन हो सके।
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान महेंद्र भट्ट ने कहा कि वर्ष 2027 की जनगणना भविष्य की विकास योजनाओं और संसाधनों के आवंटन का आधार बनेगी। ऐसे में उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सामान्य प्रक्रिया अपनाने से ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाएगी। उन्होंने आशंका जताई कि रोजगार व शिक्षा के लिए अस्थायी रूप से शहरों में रह रहे लोग वहीं दर्ज हो जाएंगे, जिससे गांवों की आबादी कागजों में कम दिखाई देगी। इसका सीधा असर स्कूल, अस्पताल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के आवंटन पर पड़ेगा।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सीमांत गांवों का लगातार खाली होना केवल विकास का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी गंभीर विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि ‘अपनी गणना–अपना गांव’ अभियान को सरकारी प्रक्रिया तक सीमित न रखकर जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए। इसके लिए ग्राम सभाओं, स्थानीय स्वयंसेवकों और मोबाइल एप के माध्यम से वास्तविक आंकड़े एकत्र किए जाएं। साथ ही पलायन, मूल निवास, बंद पड़े मकानों, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा पृथक डेटा भी संकलित किया जाए।
उन्होंने केंद्र से मांग की कि उत्तराखंड के पर्वतीय एवं सीमांत क्षेत्रों के लिए विशेष जनगणना नीति तैयार की जाए। इसमें अस्थायी पलायन और मूल निवास का अलग-अलग रिकॉर्ड रखा जाए। इसके अलावा ग्राम पंचायतों और स्थानीय सामाजिक संगठनों को जनगणना प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी दी जाए। साथ ही इस मॉडल को भविष्य में अन्य पर्वतीय राज्यों के लिए भी लागू करने पर विचार किया जाए। महेंद्र भट्ट ने कहा, ‘अपनी गणना–अपना गांव’ अभियान उत्तराखंड के पुनर्जीवन और संतुलित विकास का प्रभावी माध्यम बन सकता है।






