राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 27 जून 2026:
हिमालय की दुर्गम चोटियों के बीच होने वाली Kailash Mansarovar Yatra 2026 इस बार 4 जुलाई से शुरू होगी। उत्तराखंड के लिपुलेख मार्ग से होने वाली इस पवित्र यात्रा के लिए सरकार ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस साल 50-50 श्रद्धालुओं के 10 जत्थे यात्रा में शामिल होंगे। करीब 500 श्रद्धालु भगवान शिव के धाम कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए रवाना होंगे।
यात्रा का पहला जत्था 4 जुलाई को दिल्ली से टनकपुर पहुंचेगा। अगले दिन श्रद्धालु पिथौरागढ़ होते हुए धारचूला पहुंचेंगे। वहां से गुंजी और लिपुलेख दर्रे के रास्ते चीन सीमा पार कर कैलाश मानसरोवर की यात्रा आगे बढ़ेगी। पूरी यात्रा 4 जुलाई से 16 अगस्त तक संचालित होगी।
इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा पर खास फोकस किया गया है। हर जत्थे के साथ पांच सदस्यीय सहयोगी दल रहेगा, जिसमें एक डॉक्टर भी शामिल होगा। यात्रा के दौरान स्वास्थ्य जांच में यदि कोई श्रद्धालु आगे जाने के लिए फिट नहीं पाया गया तो डॉक्टर की सलाह पर उसे उसी पड़ाव से वापस लौटना होगा।
कुमाऊं मंडल विकास निगम के अधिकारियों के मुताबिक यात्रा मार्ग पर सभी विश्राम स्थलों, अतिथि गृहों, भोजन, चिकित्सा और सुरक्षा इंतजामों को अंतिम रूप दिया जा चुका है ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रदेश के पर्यटन और धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा उत्तराखंड की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान से जुड़ी बेहद अहम यात्रा है। लिपुलेख दर्रे की चोटी से श्रद्धालु बिना चीनी वीजा और पासपोर्ट के भी कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकते हैं। इसी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन का भी मौका मिलता है। यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए सभी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।






