
लखनऊ, 2 अगस्त 2026:
रिश्वतखोरी के आरोप में दो कर्मचारियों और उनके एक गुर्गे की गिरफ्तारी के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) प्रशासन ने भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग पर कड़ा रुख अपनाया है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार सुपरवाइजर (पम्प ऑपरेटर) चन्द्र प्रकाश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, आरोपी अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा के निलंबन की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र भेजा गया है। इसके साथ ही प्रवर्तन अनुभाग की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव करते हुए नई एडवाइजरी भी जारी की गई है।
उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) ने शनिवार को चन्द्र प्रकाश और अवर अभियंता दिनेश कुमार वर्मा को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच में श्रवण कुमार नामक एक बाहरी व्यक्ति की गिरफ्तारी भी हुई है जो एलडीए का कर्मचारी नहीं है। आरोप है कि वह कर्मचारियों से मिलीभगत कर आईजीआरएस के माध्यम से अवैध निर्माण की शिकायतें दर्ज कराता था और बाद में भवन स्वामियों को ब्लैकमेल करता था।
इस खुलासे के बाद एलडीए ने प्रवर्तन अनुभाग से जुड़े कार्यालयों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं जिससे बिचौलियों और निजी रंजिश के आधार पर शिकायत करने वाले तत्वों पर अंकुश लगाया जा सके। इस मामले में विशेष कार्याधिकारी देवांश त्रिवेदी को विभागीय जांच अधिकारी नामित किया गया है।
उपाध्यक्ष ने बताया कि अब आईजीआरएस, व्हाट्सएप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से मिलने वाली अवैध निर्माण की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई नहीं होगी। पहले शिकायतों का सघन परीक्षण किया जाएगा। उसके बाद ही कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को गलत या दुर्भावनापूर्ण शिकायत के आधार पर परेशान नहीं होने दिया जाएगा।

एलडीए ने ऐसे पेशेवर शिकायतकर्ताओं के खिलाफ भी अभियान शुरू करने का फैसला किया है जो निजी विवाद, रंजिश या ब्लैकमेलिंग की मंशा से लगातार शिकायतें दर्ज कराते हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और उनकी सूची शासन के माध्यम से सक्षम विभाग को भी भेजी जाएगी।
उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने लोगों से कहा है कि कोई बाहरी व्यक्ति या एलडीए का कर्मचारी शिकायत के नाम पर उन्हें परेशान या ब्लैकमेल करता है तो इसकी सूचना तत्काल प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को दें जिससे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।






