
लखनऊ, 4 अगस्त 2026:
यूपी में मदरसा शिक्षा को लेकर सियासी माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों पर दिए गए बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि ‘मदरसा चाहे बांग्लादेश का हो, पाकिस्तान का हो या भारत का, मदरसे अघोषित रूप से आतंकवाद पैदा करते हैं।’ उनके इस बयान के बाद सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आते दिख रहे हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब योगी सरकार मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम-2004 में संशोधन की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में मदरसों में संचालित डिग्री स्तर की पढ़ाई ‘कामिल’ (स्नातक) और ‘फाजिल’ (परास्नातक) को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। प्रस्ताव लागू होने पर राज्य के मदरसों में केवल 12वीं तक की शिक्षा ही संचालित हो सकेगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुरूप उठाया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि मदरसा शिक्षा व्यवस्था को नियामकीय ढांचे के अनुरूप बनाया जाना आवश्यक है।
उधर, डिप्टी सीएम के बयान और संभावित संशोधन को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर होने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि विधानमंडल के मौजूदा मानसून सत्र में यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठेगा। 6 अगस्त तक चलने वाले सत्र में मदरसा शिक्षा, बजट और सरकार की नीतियों पर सत्ता-विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
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उधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मदरसा शिक्षा में प्रस्तावित बदलाव और डिप्टी सीएम का बयान आगामी राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दे सकता है। अब सबकी निगाहें कैबिनेट के फैसले और मानसून सत्र में होने वाली बहस पर टिकी हैं।






