
लखनऊ, 7 अगस्त 2026:
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में वर्ष 2016 में हुई दलित हिंसा मामले को लेकर एक बार फिर गुजरात सरकार को निशाने पर लिया है। एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा कि स्थानीय अदालत से अधिकांश आरोपियों के बरी होने के बाद पीड़ित परिवारों को हाईकोर्ट में न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए आर्थिक समेत कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसे लेकर बहुजन समाज में गहरी चिंता है।
दलितों की सुरक्षा के प्रति लापरवाह है सरकार
मायावती ने कहा कि वह घटना के बाद खुद पीड़ित परिवारों से मिलने ऊना गई थीं। वहां हालात का जायजा लेने के बाद उन्होंने राज्य सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना है कि देशभर में विरोध के बावजूद 40 में से 35 आरोपियों का बरी हो जाना दलितों के हित, सुरक्षा के प्रति सरकार की लापरवाही को दिखाता है।
हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी की मांग
बसपा प्रमुख ने कहा कि गुजरात सरकार के पास अभी भी मौका है कि वह इस मामले में अपनी गलती सुधारते हुए हाईकोर्ट में मजबूती से पैरवी करे। उन्होंने मांग की कि सभी दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाए ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
सरकारी खर्च पर वकील देने की भी मांग
मायावती ने राज्य सरकार से यह भी कहा कि पीड़ित परिवारों को उनकी सहमति के मुताबिक सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार के दौरान गरीब लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने का कानूनी प्रावधान किया गया था, उसी तरह की व्यवस्था गुजरात में भी की जानी चाहिए।






