Uttarakhand

तमकनाला पर ट्रैफिक बहाल, 15 दिन में Disaster की परतें उधेड़ेंगे वैज्ञानिक, लापता की तलाश जारी

दो दिन पूर्व सैलाब में बह गया था वैली ब्रिज, घटना में सिर्फ बारिश या Cloudburst नहीं, हर संभावना की होगी जांच, Satellite Image, Drone Survey, GIS Mapping से होगी पड़ताल, भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने का भी बनेगा प्लान, वहीं पुल ध्वस्त होने के बाद रिकॉर्ड समय मे ह्यूम पाइप डालकर आवाजाही बहाल की गई, लापता की तलाश भी है जारी

देहरादून, 12 अगस्त 2026:

चमोली के ज्योतिर्मठ, मलारी मोटर मार्ग पर स्थित तमकनाला में दो दिन अचानक पानी के सैलाब व भारी मलबे में वैली ब्रिज बहने की घटना की अब वैज्ञानिक स्तर पर जांच होगी। मकसद सिर्फ यह पता लगाना नहीं है कि उस दिन क्या हुआ, बल्कि यह समझना भी है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में पानी और मलबा आया कहां से, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं का पहले से अंदाजा लगाया जा सके। फिलहाल सीएम के संज्ञान के बाद ट्रैफिक बहाल कर लापता व्यक्ति की तलाश जारी है।

सात बड़े वैज्ञानिक संस्थानों को सौंपी जिम्मेदारी

आपदा प्रबंधन विभाग ने वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान, एनआरएससी, आईआईआरएस, यू-सैक, जीएसआई, आईएमडी और एनआईएच समेत देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों से विस्तृत अध्ययन करने को कहा है। सभी संस्थानों से 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को देने को कहा गया है।

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इन सवालों के जवाब तलाशेंगे वैज्ञानिक

इस जांच का सबसे अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि अचानक जलप्रवाह बढ़ने की असली वजह क्या थी। इसके लिए वैज्ञानिक इन बिंदुओं पर काम करेंगे।

– क्या इलाके में Cloudburst हुआ था।
– क्या बहुत कम समय में Local Heavy Rain हुई।
– क्या सामान्य बारिश का पानी अचानक एक जगह इकट्ठा होकर बह निकला।
– क्या ऊपर के इलाके में भूस्खलन या चट्टान टूटने से पानी रुका और फिर एक साथ बह गया।
– क्या किसी हिमनद, झील या दूसरे प्राकृतिक जल स्रोत की भूमिका रही।
– मलबा आखिर किस स्थान से आया और उसकी मात्रा इतनी ज्यादा क्यों थी।

आधुनिक तकनीक से तैयार होगी पूरी तस्वीर

घटना की जांच सिर्फ मौके का निरीक्षण करके नहीं होगी। वैज्ञानिक घटना से पहले और बाद की Satellite Images का मिलान करेंगे। इसके साथ Drone Survey, हाई रिजॉल्यूशन Remote Sensing, GIS Mapping और रडार आधारित बारिश के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। स्थानीय मौसम केंद्रों के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे ताकि घटना के समय की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

भविष्य के खतरे भी होंगे चिन्हित

जांच सिर्फ तमकनाला तक सीमित नहीं रहेगी। विशेषज्ञ यह भी बताएंगे कि आसपास के इलाके में भविष्य में भूस्खलन, Rockfall, Flash Flood या मलबा बहने जैसी घटनाओं का कितना खतरा है। इसी आधार पर सड़क, पुल और दूसरी जरूरी परियोजनाओं की योजना तैयार करने में मदद मिलेगी।
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अर्ली वार्निंग सिस्टम पर भी बनेगी रणनीति

वैज्ञानिक यह भी सुझाव देंगे कि इलाके में Real Time Monitoring System, Rain Gauge, Water Level Sensor, कैमरा आधारित निगरानी और Early Warning System लगाने की जरूरत है या नहीं। इससे भविष्य में खतरे की स्थिति बनने पर पहले से अलर्ट जारी किया जा सकेगा।

ह्यूम पाइप डालकर शुरू हुई वाहनों की आवाजाही

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद तमक नाले में रिकॉर्ड समय में यातायात बहाल कर दिया गया है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने युद्धस्तर पर काम करते हुए ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी मोटर मार्ग तैयार किया, जिससे वाहनों की आवाजाही फिर शुरू हो गई। नीती घाटी में भारी बारिश के कारण तमक नाले में वैली ब्रिज बह जाने से मार्ग बंद हो गया था।

लापता व्यक्ति की तलाश जारी, प्रशासन ने सावधानी बरतने की अपील की

वैली ब्रिज बहने की घटना के बाद लापता एक व्यक्ति की तलाश दूसरे दिन भी जारी रही। जिला प्रशासन, पुलिस, भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सीमा सड़क संगठन की टीमें संयुक्त रूप से सर्च और रेस्क्यू अभियान चला रही हैं। नदी किनारे और आसपास के संभावित इलाकों में लगातार तलाश की जा रही है। प्रशासन मौके की स्थिति और मौसम पर नजर बनाए हुए है तथा जलस्तर को देखते हुए सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों से अपील की गई है कि अस्थायी मार्ग से गुजरते समय पूरी सावधानी बरतें और मौके पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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