
योगेंद्र मलिक
देहरादून, 17 अगस्त 2026ः
उत्तराखंड के मदरसों में अब बच्चों को धार्मिक और शैक्षणिक शिक्षा के साथ भाईचारे, समाज सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में भाईचारे और समाज सेवा से जुड़े नए अध्याय शामिल किए गए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार विकसित करने के साथ उन्हें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। इसी क्रम में मदरसों में ‘शुक्र की डायरी’ शुरू की गई है। इसमें विद्यार्थी प्रतिदिन किए गए अच्छे कार्य, किसी की मदद करने अथवा समाजोपयोगी गतिविधियों का उल्लेख करेंगे। इसके माध्यम से बच्चों में सकारात्मक सोच और सेवा भाव विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि ईद, बकरीद और मुहर्रम सहित अन्य अवसरों पर आयोजित कार्यक्रमों में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित कर आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश देने पर जोर रहेगा। वहीं, मदरसों में उर्दू के साथ हिंदी में भी वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इससे विद्यार्थियों में तर्क करने, दूसरों के विचार सुनने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता विकसित होगी।
डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि उत्तराखंड में पहले मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त 452 मदरसे संचालित थे। 30 जून से व्यवस्था बदलकर इन्हें अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत संचालित किया जाना है। करीब डेढ़ माह बीतने के बावजूद अब तक केवल 60 मदरसों के आवेदन शिक्षा विभाग को प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि बिना मान्यता बच्चों को दाखिला देकर मदरसे संचालित करने वाले संचालकों के संबंध में शासन को सोमवार तक रिपोर्ट भेजी जाएगी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता लेने के लिए मदरसा संचालकों को आवेदन करना होगा।






