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भारत-जापान की नई पीढ़ी का अद्भुत संगम : CM योगी व गवर्नर नागासाकी की मौजूदगी में जब गूंजे राम भजन और जापानी गीत

​‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ कार्यक्रम में यामानाशी प्रान्त से आए 13 जापानी विद्यार्थियों ने यूपी के बच्चों संग साधा आत्मीय संवाद, योगी ने 'ओहायो गोजाइमासु' तो बच्चों ने 'डोरेमोन' के जरिए जताया अपनापन

​लखनऊ, 21 अगस्त 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास शुक्रवार को एक बेहद अनोखे और ऐतिहासिक पल का गवाह बना। अवसर था उत्तर प्रदेश-जापान निवेश बैठक के क्रम में आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ का जहां कूटनीतिक औपचारिकताएं पीछे छूट गईं। दो देशों के बच्चों की मुस्कान ने भाषाओं की सीमा लांघकर दोस्ती का एक मजबूत और सहज सेतु बना दिया। जापान के यामानाशी प्रान्त से आए 13 विद्यार्थियों और उनके फैकल्टी सदस्यों ने लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों के साथ सीधा संवाद किया।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जापान के यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम ने स्पष्ट किया कि भारत और जापान के आगामी रिश्तों की नींव आज की युवा पीढ़ी के मन में बहुत मजबूती से रखी जा रही है।

​जापानी अभिवादन से शुरुआत और ‘हार्टलैंड ऑफ इंडिया’ का संदेश

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​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण की शुरुआत जापानी अभिवादन ‘ओहायो गोजाइमासु’ (सुप्रभात) से की, जिससे पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। सीएम योगी ने जापानी दल का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि 25 करोड़ से अधिक आबादी वाला उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है। इसे ‘हार्टलैंड ऑफ इंडिया’ के रूप में देखा जाता है। यह भूमि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र है।

​उन्होंने यामानाशी के विद्यार्थियों की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने आगरा में ताजमहल देखा है। मथुरा पास में ही है और अब वे दुनिया की सबसे प्राचीन नगरियों में से एक वाराणसी तथा सारनाथ की यात्रा करेंगे, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। ऐसे में यह यात्रा जापानी बच्चों के लिए भारत की आध्यात्मिकता, संस्कृति और सभ्यतागत विरासत को बेहद करीब से देखने और जानने का स्वर्णिम अवसर है।

​भविष्य के राजदूत : जब लखनऊ के गांव का बच्चा मिला जापान के गांव के बच्चे से

​मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के ये विद्यार्थी भविष्य के राजदूत के रूप में इस ऐतिहासिक संबंध को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का सामर्थ्य रखते हैं। एक बेहद मार्मिक तुलना करते हुए सीएम ने कहा कि एक ओर भारत की सबसे बड़ी युवा कार्यशक्ति वाले यूपी के बच्चे हैं तो दूसरी ओर तकनीक, अनुशासन और प्रतिबद्धता के लिए जाने जाने वाले जापान के बच्चे। एक बच्चा लखनऊ के किसी गांव से आया है, तो दूसरा जापान के गांव से। एक हिंदी बोलता है, तो दूसरा जापानी लेकिन दोनों में सबसे बड़ी समानता यह है कि दोनों अपने और अपने देशों के उज्ज्वल भविष्य की नई कहानी लिख रहे हैं।
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​उन्होंने कहा कि जापानी पीढ़ी के लिए यह अवसर भारत को केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘साझा सभ्यतागत मित्र’ के रूप में देखने का है। वहीं भारतीय विद्यार्थियों को जापान की अनुशासित कार्य संस्कृति, ‘इकीगाई’ (जीवन का उद्देश्य), टीमवर्क, स्वच्छता और समयबद्धता से सीख लेनी चाहिए।

​’वसुधैव कुटुम्बकम्’ और जापानी दर्शन का अद्भुत सामंजस्य

​संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (पूरा विश्व एक परिवार है) और जापान के सामाजिक सामंजस्य के बीच की गहरी समानता को रेखांकित किया। उन्होंने संस्कृत का प्रसिद्ध श्लोक उद्धृत करते हुए समझाया- ​अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥ ​अर्थात, ‘यह मेरा है और यह पराया है’ ऐसी सोच संकुचित मन वालों की होती है जबकि उदार चरित्र वालों के लिए संपूर्ण धरा ही परिवार है।

सीएम योगी ने कहा कि यही भावना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जापान की शक्ति ‘प्रिसिजन, क्वालिटी और इनोवेशन’ में है, जबकि भारत की ताकत ‘युवा शक्ति, प्रतिभा और सृजनात्मकता’ है। जब ये दोनों शक्तियां साथ आएंगी तो वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। सीएम ने अपने संबोधन का समापन जापानी शब्द ‘अरिगातो गोजाइमासु’ (धन्यवाद) कहकर किया।

​गवर्नर नागासाकी बोले- यह सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम न रहे

​यामानाशी प्रान्त के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और लखनऊ के बच्चों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देशों को करीब लाने के लिए हमारी समानताओं और भिन्नताओं को समझना जरूरी है। उन्होंने यामानाशी की उस सोच को रेखांकित किया, जो दूसरों को समृद्ध बनाकर खुद की समृद्धि सुनिश्चित करने में विश्वास रखती है। गवर्नर ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि यह मुलाकात महज एक दिन का औपचारिक आयोजन न रहे, बल्कि वे इस दोस्ती को ताउम्र आगे बढ़ाएँ।
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​जब जापानी कोरस और राम भजन से गुंजायमान हुआ सीएम आवास

​भाषणों के बाद का सत्र बेहद सांस्कृतिक और भावनात्मक रंगों से भरा रहा। ​संगीतमय जुगलबंदी में जापानी विद्यार्थियों ने समूह में अपनी भाषा में एक मधुर गीत प्रस्तुत किया, जिसके जवाब में लखनऊ के छात्र ईशान ने भगवान श्रीराम को समर्पित प्रसिद्ध भजन ‘कौशल्या दशरथ के नंदन’ गाकर समां बांध दिया। दो अलग-अलग भाषाओं के इन गीतों ने साबित कर दिया कि संगीत और भावनाएँ दिलों को जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम हैं।

​डोरेमोन और अतिथि देवो भव

लखनऊ की छात्रा अक्षरा पांडेय ने जापानी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत के बच्चे जापानी कार्टून ‘डोरेमोन’ देखकर बड़े हुए हैं, इसलिए जापानी संस्कृति भारतीय बच्चों के लिए अनजान नहीं है। उन्होंने ‘अरिगातो’ कहकर उनका अभिवादन किया।

​बिंदी, ताजमहल और ओरिगेमी का जादू

जापानी छात्र कजामा ने पहली बार विदेश यात्रा का अनुभव साझा करते हुए ताजमहल की भव्यता और भारतीय सड़कों की चहल-पहल पर आश्चर्य जताया। वहीं, छात्रा मियागी मोतो ने कहा कि भारत में पहली बार माथे पर ‘बिंदी’ लगाना उनके लिए एक अद्भुत और यादगार अनुभव रहा।

​ओरिगेमी से शांति का संदेश

जापानी विद्यार्थियों ने अपने हाथों से कागज की कलाकृतियां (ओरिगेमी) बनाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट कीं, जिसके जरिए उन्होंने विश्व शांति और स्थायी मित्रता का सुंदर संदेश दिया।

​सीएम योगी के साथ बच्चों ने ली सेल्फी, संजोईं अमिट यादें

​कार्यक्रम के अंतिम क्षणों में औपचारिकताएं पूरी तरह घुल गईं जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी और भारतीय विद्यार्थियों के बीच जाकर उनके साथ खुद सेल्फी ली। मुख्यमंत्री के साथ तस्वीर खिंचवाने को लेकर बच्चों में भारी उत्साह देखने को मिला।

​’ए डायलॉग विद द Future’ ने यह साबित कर दिया कि भाषाएं और सीमाएं भले भिन्न हों लेकिन साझा सपनों, पारस्परिक सम्मान और नई पीढ़ी की निश्छल दोस्ती के बल पर भारत और जापान की रणनीतिक व सांस्कृतिक साझेदारी का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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