Lucknow News : टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सम्मेलन में TET से OPS तक उठी आवाज, देश भर से पहुंचे शिक्षक प्रतिनिधि
TET की अनिवार्यता खत्म करने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग, शिक्षकों को केंद्रीय विद्यालय के समान वेतन देने का मुद्दा भी उठा, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने उचित फोरम पर मांगें रखने का भरोसा दिया, नीरज सिंह बोले- फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल की मंत्रालय से कराएंगे वार्ता

लखनऊ, 5 अक्टूबर 2026:
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में Teachers Federation of India (TFI) का वार्षिक सम्मेलन अटल बिहारी बाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में हुआ। सम्मेलन में देश के कई राज्यों से पहुंचे शिक्षक प्रतिनिधियों ने TET की अनिवार्यता खत्म करने, Old Pension Scheme (OPS) बहाल करने, वेतन विसंगतियां दूर करने समेत शिक्षकों से जुड़ी 11 मांगें प्रमुखता से उठाईं।
TET से पुरानी पेंशन तक उठी आवाज
कार्यक्रम में Deputy CM बृजेश पाठक मुख्य अतिथि रहे, जबकि भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, जम्मू कश्मीर, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात और बंगाल समेत कई राज्यों के शिक्षक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में शिक्षकों की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर फेडरेशन की आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
बृजेश पाठक ने दिया मांगों पर भरोसा
बृजेश पाठक ने कहा कि शिक्षक सिर्फ ज्ञान देने का काम नहीं करते, बल्कि नई पीढ़ी के व्यक्तित्व और चरित्र को तैयार करने के साथ राष्ट्र निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा और शिक्षकों के हित में कई काम किए हैं। फेडरेशन की ओर से रखी गई मांगों को उचित फोरम पर उठाकर समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
नीरज सिंह बोले, मंत्रालय से कराएंगे वार्ता
नीरज सिंह ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं और देश के भविष्य को तैयार करने में उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन की मांगों के समाधान के लिए जल्द ही उसके प्रतिनिधिमंडल की मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ वार्ता कराई जाएगी। उन्होंने शिक्षकों के साथ खड़े रहने की बात भी कही।

समन्वय से समाधान की कोशिश, नहीं बनी बात तो संघर्ष
राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दिनेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि देश में शिक्षकों के सामने TET की अनिवार्यता, पुरानी पेंशन समेत कई समस्याएं हैं। फेडरेशन फिलहाल इन मुद्दों के समाधान के लिए समन्वय का रास्ता अपना रहा है। भारत सरकार और राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर समस्याओं के समाधान की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर समन्वय से बात नहीं बनी तो संघर्ष का रास्ता भी चुना जाएगा।
2027 का अधिवेशन झारखण्ड में होगा, 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा
फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव राम मूर्ति ठाकुर ने देशभर से आए शिक्षक प्रतिनिधियों का आभार जताया। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2027 का अधिवेशन झारखण्ड में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में बृजेश पाठक और नीरज सिंह को फेडरेशन की ओर से मांग पत्र सौंपा गया। इसमें शिक्षा के अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता खत्म करने से लेकर पुरानी पेंशन बहाली तक की मांग शामिल है।
सम्मेलन में इन पदाधिकारियों का रहा सहयोग
महामंत्री संजय सिंह के संचालन में इस सम्मेलन को सफल बनाने में संजय सिंह, शिवशंकर पाण्डेय, राधेरमण त्रिपाठी, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, सुधांशु मोहन, वन्दना सक्सेना, गौहर अहमद भट, विपिन प्रकाश शर्मा, ध्रुवपद घोषाल, कृष्णानंद राय, बृजेश पाण्डेय, राहुल गवहाणे, प्रदीप पाटिल, वेद प्रकाश मिश्रा, अजय सिंह, त्रिवेन्द्र कुमार, आशुतोष त्रिपाठी, अक्षत पाण्डेय, संजीव शर्मा और प्रियांशु गौड़ का विशेष सहयोग रहा।

पुराने शिक्षकों को TET से छूट के साथ ये प्रमुख मांगे रखीं गईं
फेडरेशन ने देश के अलग-अलग राज्यों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET पास करने की अनिवार्यता से बाहर रखने के लिए कानून बनाने की मांग की है। वहीं PFRDA/NPS/UPS को खत्म करके पुरानी पेंशन योजना यानी OPS बहाल करने की मांग की गई है। फेडरेशन ने इसे देशभर के शिक्षकों के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।
केंद्रीय विद्यालय के समान वेतन की मांग
देशभर के राज्यों के शिक्षकों को केंद्रीय विद्यालय के शिक्षकों के समान वेतनमान देने की मांग की गई है। साथ ही आठवें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों की तरह संशोधित सुनिश्चित कैरियर योजना के आधार पर वेतन लाभ देने की मांग भी रखी गई है।
हर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल में प्रधानाध्यापक
फेडरेशन ने प्रत्येक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद को मंजूरी देने के साथ उनकी तैनाती की मांग की है। फेडरेशन ने शिक्षकों को मतदान अधिकारी, 10 वर्षीय जनगणना और दैवीय आपदा से जुड़े कामों को छोड़कर दूसरे गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की मांग की है। मांग पत्र में राज्यों के शिक्षकों के लिए केंद्रीय विद्यालय के शिक्षकों को मिलने वाली अवकाश व्यवस्था के अनुरूप छुट्टियों की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

20 लाख का स्वास्थ्य बीमा, 2 करोड़ का टर्म इंश्योरेंस
फेडरेशन ने देशभर के शिक्षकों के लिए कम से कम 20 लाख रुपये का निशुल्क स्वास्थ्य बीमा देने की मांग की है। इसके साथ 2 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस देने की मांग भी रखी गई है। फेडरेशन ने संविधान के अनुच्छेद 171 (3) (ग) में संशोधन की मांग की है। इसके तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मताधिकार देने की मांग की गई है। मांग पत्र में बाल्य देखभाल अवकाश यानी Child Care Leave के लिए संतानों की संख्या से जुड़ी पाबंदी हटाने की मांग भी शामिल है।
मर्ज किए गए स्कूल फिर शुरू करने की मांग
फेडरेशन ने देशभर में विद्यालयों के संविलियन यानी merger पर रोक लगाने की मांग की है। पहले से मर्ज किए जा चुके विद्यालयों को दोबारा संचालित करने की मांग भी रखी गई है। सेवा के दौरान मृत शिक्षकों के ऐसे आश्रितों को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त करने की मांग की गई है, जिन्होंने BTC/D.El.Ed., प्राथमिक स्तर की TET या B.Ed. और उच्च प्राथमिक स्तर की TET पास की हो। फेडरेशन ने प्राथमिक स्तर की योग्यता रखने वाले आश्रितों को प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक स्तर की योग्यता वाले आश्रितों को उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त करने की मांग रखी है।






