प्रमोद कुमार
मलिहाबाद (लखनऊ), 31 जुलाई 2026:
मलिहाबाद समेत लखनऊ के अन्य आम उत्पादक इलाकों में कलमी आम के पेड़ों के कटान का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहुंच गया है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सरकार को तीन हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए दो हफ्ते का समय मिलेगा।
25 फरवरी की अधिसूचना को दी गई चुनौती
यह मामला स्थानीय किसान महेश साहू की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में 25 फरवरी को जारी की गई उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए पेड़ों के कटान से जुड़ी पहले की अधिसूचना की अवधि 31 दिसंबर 2027 तक बढ़ा दी गई थी। मामले में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव को भी पक्षकार बनाया गया है।
2020 के आदेश का भी दिया हवाला
याचिकाकर्ता का कहना है कि 7 जनवरी 2020 की अधिसूचना में देसी आम के पेड़ों के साथ खास तौर पर कलमी प्रजाति के पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई गई थी। इससे पहले 2017 में जारी अधिसूचना में इन पेड़ों को कटान की सूची में रखा गया था। याचिका में इसी बदलाव और बाद में अवधि बढ़ाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

कलमी आम की प्रजातियों पर बुरे असर का दावा
याचिका में कहा गया है कि अधिसूचना की अवधि बढ़ाए जाने के बाद आम उत्पादक इलाकों में कलमी आम के पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई हो रही है। इससे दशहरी समेत कलमी आम की दूसरी प्रजातियों के अस्तित्व पर असर पड़ने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता ने 25 फरवरी की अधिसूचना को गैरकानूनी और मनमाना बताते हुए उसे चुनौती दी है।
11 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 11 सितंबर की तारीख तय की है। इस दौरान सरकार को पेड़ों के कटान से जुड़ी अधिसूचना और उसके विस्तार को लेकर अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखना होगा।






