Uttarakhand

नेपाल में आपदा पर उत्तराखंड सरकार अलर्ट, ग्लेशियर झीलों की होगी रियल टाइम निगरानी

नेपाल की आपदा के बाद जिलों की तैयारियों की भी समीक्षा, अर्ली वार्निंग सिस्टम से संवेदनशील झीलों की होगी निगरानी, 13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित, चार झीलों का सर्वे पूरा

देहरादून, 28 अगस्त 2026:

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से पैदा होने वाले खतरे को देखते हुए सरकार ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है। संवेदनशील झीलों पर अत्याधुनिक Early Warning System लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को नियमित वैज्ञानिक निगरानी के साथ जरूरत के मुताबिक ऐसे सिस्टम की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

झीलों की स्थिति पर होगा वैज्ञानिक अध्ययन

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को प्रदेश की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वे कराने को कहा गया है। इसमें झील का जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भू-भाग की स्थिति, संभावित खतरे वाले इलाके समेत डाउनस्ट्रीम क्षेत्र पर पड़ने वाले असर का आकलन किया जाएगा। आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण, संचार साधनों समेत जरूरी तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।

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केवल अलर्ट नहीं, नुकसान कम करने की तैयारी

सरकार का फोकस सिर्फ Warning System लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, स्थानीय चेतावनी व्यवस्था, संचार नेटवर्क, राहत-बचाव संसाधनों की तैयारी को मजबूत किया जाएगा। स्थानीय लोगों को भी ग्लेशियर झील से जुड़े संभावित खतरे की स्थिति में सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने की जानकारी दी जाएगी।

13 झीलें संवेदनशील श्रेणी में

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के मुताबिक उत्तराखंड में 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इनमें चार झीलों का सर्वे पूरा हो चुका है। बाकी झीलों का सर्वे चरणबद्ध तरीके से कराया जाएगा। इसी कड़ी में चमोली की सरस्वती ताल, उत्तरकाशी की केदारताल के लिए जल्द विशेषज्ञ दल भेजा जाएगा।
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केदारताल, सरस्वती ताल की मौजूदा स्थिति जांचेंगे

विशेषज्ञ दल दोनों झीलों की मौजूदा स्थिति, जलस्तर, खतरे की वजह बन सकने वाले कारकों की जांच करेगा। इसके साथ ही झील से संभावित पानी निकलने की स्थिति में नीचे के इलाकों पर पड़ने वाले असर का भी आकलन किया जाएगा। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुरक्षा व्यवस्था तय की जाएगी।

नेपाल की आपदा के बाद जिलों की समीक्षा

मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी सेवानिवृत्त ने नेपाल में हुई आपदा के बाद उत्तराखंड की तैयारियों की समीक्षा की। सभी जिलाधिकारियों के साथ हुई बैठक में ग्लेशियर झीलों, नदियों के जलस्तर, संवेदनशील स्थानों, Early Warning System, संचार व्यवस्था, आपदा के समय Response Mechanism समेत स्थानीय संसाधनों की स्थिति देखी गई।

असामान्य गतिविधि की सूचना तुरंत देने के निर्देश

जिलाधिकारियों से अपने-अपने जिलों में जोखिम वाले इलाकों की लगातार निगरानी रखने को कहा गया है। ग्लेशियर झील, नदी या किसी दूसरे संवेदनशील क्षेत्र में असामान्य बदलाव दिखने पर इसकी सूचना तत्काल उच्च स्तर तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। डैम व बैराज प्रबंधकों के साथ नियमित बैठक करने पर भी जोर दिया गया।

नदी का जलस्तर बढ़ने पर पहले मिलेगा अलर्ट

विनय रुहेला ने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियां नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों से काफी मिलती हैं। ऐसे में नेपाल की घटना से सबक लेते हुए संभावित जोखिम वाले स्थानों की लगातार निगरानी जरूरी है। डैम से पानी छोड़े जाने की स्थिति में नीचे रहने वाली आबादी को समय रहते अलर्ट करने की व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया है।
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गांवों तक पहुंचेगी आपदा की सूचना

ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी सेवानिवृत्त ने स्थानीय स्तर पर आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने ग्राम प्रधानों, स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ मजबूत संचार नेटवर्क तैयार करने की जरूरत बताई, ताकि किसी आपात स्थिति में चेतावनी सबसे पहले प्रभावित गांवों तक पहुंच सके।

रियल टाइम डेटा से होगी निगरानी

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक संवेदनशील झीलों की लगातार निगरानी के लिए आधुनिक सेंसर, Early Warning Devices, Real Time Data System लगाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर उपकरणों की संख्या बढ़ाई जाएगी। चेतावनी व्यवस्था के लिए वैकल्पिक संचार माध्यम भी तैयार किए जाएंगे, जिससे किसी एक नेटवर्क के फेल होने पर सूचना पहुंचाने में दिक्कत न आए। बैठक में एसीईओ प्रशासन प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा समेत विभाग के दूसरे अधिकारी मौजूद रहे।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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