
लखनऊ, 29 अगस्त 2026:
रक्षाबंधन के पर्व पर यूपी की राजधानी लखनऊ के सदर इलाके में एक बार फिर अखाड़ा गुलजार है। 139 साल पुराने ऐतिहासिक दंगल में देशभर के 200 से अधिक पहलवान जोर-आजमाइश के लिए उतरे हैं। कैंट स्थित हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज के मैदान में सजे अखाड़े में शुक्रवार शाम से शुरू हुई कुश्ती देर रात तक चलती रही। पहले दिन यूपी के अलग-अलग जिलों से पहुंचे पहलवानों ने अपने-अपने मुकाबलों में प्रतिद्वंद्वियों को पटखनी देकर अगले दौर में जगह बनाई।

दो दिवसीय इस दंगल का आयोजन अखिल भारतीय मस्ता पहलवान गुरुजी श्रीरामचंद्र स्मारक की ओर से कराया जा रहा है। दंगल के अंतिम विजेता को 51 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यही वजह है कि रक्षाबंधन के इस पारंपरिक मुकाबले का पहलवानों को पूरे साल बेसब्री से इंतजार रहता है।
इस बार अखाड़े में मुकाबला सिर्फ यूपी के पहलवानों के बीच नहीं है। दिल्ली के गुरु हनुमान अखाड़े और छत्रसाल स्टेडियम के प्रशिक्षु, हरियाणा के मनका अखाड़े और पंजाब के दुष्यंत अखाड़े के पहलवान भी लखनऊ पहुंचे हैं। यानी अखाड़े में अलग-अलग राज्यों की कुश्ती तकनीक और ताकत का सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
दंगल की सबसे खास बात इसकी 139 साल पुरानी परंपरा है। बुजुर्ग पहलवान बताते हैं कि वे वर्ष 1984 से लगातार इस दंगल का हिस्सा बनते रहे हैं और करीब दो दशक तक इसी मैदान में कुश्ती लड़ चुके हैं। उनके मुताबिक समय के साथ कुश्ती का स्वरूप बदला है लेकिन अखाड़े का जुनून आज भी कायम है।

आयोजकों का कहना है कि प्रतिभाओं की यहां कोई कमी नहीं है लेकिन संसाधनों का अभाव बड़ी चुनौती है। पर्याप्त सुविधाएं और प्रशिक्षण मिले तो इस अखाड़े से निकलने वाले कई युवा पहलवान राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
पहलवानों और आयोजकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय पहलवानों के पदक जीतने से युवाओं में कुश्ती के प्रति उत्साह बढ़ा है। देश के इस पारंपरिक खेल को और प्रोत्साहन देने की जरूरत है जिससे अखाड़ों की मिट्टी से निकला हुनर राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बना सके।






