
लखनऊ, 28 जुलाई 2026:
यूपी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए मिसाल बनकर उभरा है। जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया गया। इसके चलते उत्तर प्रदेश संयुक्त राष्ट्र के छठे सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-6) के मानकों को हासिल करने में सफल हो गया है।
भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉ. राजेश कुमार प्रजापति के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश में भूजल दोहन की दर 71.26 प्रतिशत थी। यह अब घटकर 70 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित मानक के अनुरूप है। वहीं प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज भी 2017 के 69.91 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) से बढ़कर वर्ष 2025 में 73.39 बीसीएम हो गया। यह उपलब्धि वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और आधुनिक तकनीकों के समन्वित उपयोग का परिणाम है।
जल संरक्षण अभियानों का सबसे बड़ा असर अतिदोहित क्षेत्रों में देखने को मिला। वर्ष 2017 में प्रदेश में 82 अतिदोहित विकासखंड थे। इनकी संख्या घटकर 44 रह गई है। वहीं सुरक्षित श्रेणी के विकासखंडों की संख्या 540 से बढ़कर 563 हो गई। वैज्ञानिक भूजल प्रबंधन और योजनाबद्ध कार्यों ने प्रदेश की जल स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है।
‘कैच द रेन’ अभियान के तहत वर्ष 2021 से 2025 के बीच 3.39 लाख वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं। 1.34 लाख पारंपरिक जल निकायों का पुनर्जीवन किया गया और 14.38 लाख जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्य पूरे हुए। इसके अलावा 1.33 लाख भूजल पुनर्भरण और दोबारा उपयोग से जुड़ी संरचनाओं का निर्माण कर वर्षा जल को जमीन में पहुंचाने की दिशा में बड़ा अभियान चलाया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में अटल भूजल योजना ने भी सकारात्मक परिणाम दिए हैं। 26 विकासखंडों में ग्राम पंचायत आधारित वाटर सिक्योरिटी प्लान लागू किए गए। स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार 550 ग्राम पंचायतों में से 303 पंचायतों में भूजल स्तर 0.5 से 2 मीटर तक बढ़ा है। इससे कई क्षेत्र अतिदोहित और सेमी-क्रिटिकल श्रेणी से सुरक्षित श्रेणी की ओर बढ़े हैं।
योगी सरकार ने रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग को भी व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया। प्रदेश में 1,05,593 उपयुक्त भवनों की पहचान की गई जिनमें से 35,206 भवनों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित हो चुकी है। भूगर्भ जल विभाग ने 227 भवनों पर ऐसी व्यवस्था विकसित कर प्रतिवर्ष लगभग 4252.80 लाख लीटर संभावित भूजल पुनर्भरण क्षमता तैयार की है।
जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने में विभिन्न विभागों की भूमिका भी अहम रही। लघु सिंचाई विभाग ने 6,627 चेकडैम बनाकर 14 हजार करोड़ लीटर जल भंडारण और 10 हजार करोड़ लीटर वार्षिक भूजल रिचार्ज क्षमता विकसित की। 1,417 तालाबों का जीर्णोद्धार, 6,800 से अधिक भवनों पर रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ग्राम्य विकास विभाग द्वारा 19,974 अमृत सरोवरों का विकास तथा कृषि विभाग द्वारा 37,273 खेत तालाबों का निर्माण प्रदेश में जल संरक्षण की मजबूत नींव बन चुके हैं। इन प्रयासों से भूजल स्तर में सुधार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता और कृषि उत्पादकता को भी नई मजबूती मिली है।






