
लखनऊ, 30 अगस्त 2026:
यूपी कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे ने प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी के साथ सियासी गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। हालांकि इस मामले पर अभी ब्यूरोक्रेसी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन विपक्ष ने इसे लेकर योगी सरकार पर हमला तेज कर दिया है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिव्या मित्तल के इस्तीफे के संदर्भ में प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण ईमानदार अधिकारी काम नहीं करना चाहते और उन्हें सम्मान भी नहीं मिल रहा है। अखिलेश ने दावा किया कि कई अधिकारियों ने रिटायरमेंट के लिए लिख दिया है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी हो रही है। उन्होंने मंदिर चोरी के मामलों में भी ईमानदार अधिकारियों को काम करने का अवसर नहीं दिए जाने का आरोप लगाया।
इसके साथ अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार पर और तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में ईमानदार अधिकारियों पर कई तरह के दबाव हैं। इनमें कमीशनखोरी, भाजपाइयों को टेंडर दिलाने में हेराफेरी, ट्रांसफर-पोस्टिंग को कथित तौर पर कमाई का जरिया बनाना और चंदा-पर्ची के नाम पर वसूली जैसे आरोप शामिल हैं।
उप्र में भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के कारण ईमानदार अधिकारी निम्नलिखित कई तरह के दबाव में हैं :
– कमीशनख़ोरी से भ्रष्टाचार करने
– भाजपाइयों को टेंडर दिलवाने में हेराफेरी करने
– ट्रांसफ़र-पोस्टिंग को धंधा बनाते हुए पैसे लेने
– चंदा-पर्ची कटवाकर वसूली करवाने
– विपक्ष पर…— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 30, 2026
अखिलेश ने विपक्ष पर झूठे मुकदमे, हिरासत में मौत, फेक एनकाउंटर का डर दिखाकर वसूली, कारोबारियों से धन उगाही और बलात्कार-अपहरण के मामलों को दबाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं के उत्पीड़न तथा मंदिर चोरी के मामलों में एफआईआर न दर्ज करने का भी आरोप लगाया।
सपा प्रमुख ने कहा कि ऐसे और भी कई कारण हैं जिनके चलते अधिकारियों पर कथित तौर पर अनैतिक और अवैध काम करने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारियों के बिना कोई भी शासन-प्रशासन नहीं चल सकता।






