Lucknow City

जेम पर यूपी ने रचा इतिहास : 1 लाख करोड़ रुपये की खरीद का आंकड़ा पार, योगी सरकार को मिले 3 राष्ट्रीय अवॉर्ड

योगी सरकार के डिजिटल खरीद मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर धूम, देश के राज्यों की कुल खरीद में 30% से ज्यादा हिस्सेदारी, एमएसएमई, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए खुला सरकारी बाजार

लखनऊ, 31 अगस्त 2026:

यूपी ने सरकारी खरीद के मोर्चे पर नया रिकॉर्ड बनाया है। इसने देश के बाकी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के जरिए अब तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद दर्ज की है। खास बात यह है कि देश के सभी राज्यों द्वारा जेम के माध्यम से की गई कुल खरीद में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक है। यह आंकड़ा बताता है कि सरकारी खरीद में डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाने के मामले में यूपी किस तेजी से आगे बढ़ा है।

2017 में जेम की स्थापना के बाद से उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों ने बड़े पैमाने पर इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया है। इसका असर सिर्फ खरीद के आंकड़ों में नहीं, अपितु खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही में भी दिखाई दे रहा है। सरकारी दफ्तरों की खरीद अब पारंपरिक प्रक्रियाओं के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अधिक व्यवस्थित और प्रतिस्पर्धी तरीके से हो रही है।

तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से बढ़ा यूपी का कद

ये भी पढ़ें:

उत्तर प्रदेश की इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी पहचान मिली है। गत 10 अगस्त को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जेम के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए।

up-geM-1-lakh-crore-government-procurement-3-national-awards (2)

यूपी को जेम ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट जेम प्रोक्योरमेंट वैल्यू और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड से सम्मानित किया गया। ये पुरस्कार उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव शशिभूषण लाल सुशील ने प्राप्त किए। खास तौर पर क्षमता निर्माण और जागरूकता के क्षेत्र में प्रदेश की पहल को भी राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।

1 लाख करोड़ रुपये की खरीद में ‘वैल्यू फॉर मनी’ का जोर

सरकार के मुताबिक जेम पर 1 लाख करोड़ से अधिक की खरीद महज एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है। इसके पीछे सरकारी खरीद को ट्रांसपेरेंट, कॉम्पिटिटिव, एफिशिएंट और ‘वैल्यू फॉर मनी’ बनाने की नीति है। डिजिटल खरीद व्यवस्था ने अधिक विक्रेताओं को सरकारी बाजार में प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया है। इससे सरकारी संस्थानों को बेहतर कीमत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और सेवाएं हासिल करने में मदद मिल रही है।

छोटे कारोबारियों से लेकर स्टार्टअप्स तक को मौका

जेम के बढ़ते इस्तेमाल का एक बड़ा असर यह भी है कि सरकारी बाजार का दायरा बड़े कारोबारियों से आगे बढ़ा है। एमएसएमई, महिला उद्यमियों, एससी/एसटी वर्ग के उद्यमों और स्टार्टअप्स को भी सरकारी खरीद में अपनी भागीदारी बढ़ाने का डिजिटल मंच मिला है। स्थानीय कारोबारी अब सिर्फ प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच बना सकते हैं।

ट्रेनिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग ने बनाई राह

यूपी की इस सफलता में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की रणनीति भी अहम रही है। सरकारी अधिकारियों, विभागों और अन्य हितधारकों के लिए लगातार प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए जिससे जेम की सुविधाओं और प्रक्रियाओं का प्रभावी इस्तेमाल हो सके। इसी प्रयास को ‘बेस्ट आउटरीच इनिशिएटिव फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग’ से भी राष्ट्रीय मान्यता मिली।

जेम पर 1 लाख करोड़ का आंकड़ा उत्तर प्रदेश के उस प्रशासनिक मॉडल को रेखांकित करता है जिसमें सरकारी खरीद को डिजिटल तकनीक के जरिए तेज, पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और ज्यादा समावेशी बनाने पर जोर है। तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ यह रिकॉर्ड योगी सरकार के डिजिटल गवर्नेंस मॉडल की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है।

ये भी पढ़ें  बदहाल सड़क व जलभराव ने किया नाक में दम... वार्डवासियों का गुस्सा फूटा, रोड पर दिया धरना

Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button