लखनऊ, 14 जून 2026:
कोविड महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों के लिए यूपी की योगी सरकार एक अभिभावक की भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड) के माध्यम से अनाथ और बेसहारा बच्चों को आर्थिक, शैक्षिक और डिजिटल सहायता देकर उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में महिला कल्याण विभाग द्वारा अब तक 8085 बच्चों को लैपटॉप वितरित किए जा चुके हैं। इससे वे डिजिटल शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़कर अपने सपनों को नई उड़ान दे सकें।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। इसका मकसद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाना भी है। डिजिटल युग की जरुरतों को देखते हुए लैपटॉप वितरण से बच्चों को ऑनलाइन अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिल रहा है। इससे उनके लिए ज्ञान और रोजगार के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।
मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 11 से 18 वर्ष तक के बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा 12 तक मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही हर पात्र बच्चे को उसकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए प्रतिमाह 14 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। यह राशि बच्चों की शैक्षिक जरूरतों, किताबों, स्टेशनरी और अन्य जरूरी संसाधनों की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संसाधनों की कमी के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निशुल्क शिक्षा, आर्थिक सहायता और डिजिटल संसाधनों का यह समन्वित मॉडल सामाजिक सुरक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रभावी पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। आधुनिक शैक्षिक सुविधाओं के माध्यम से बच्चों को प्रतिस्पर्धी माहौल से जोड़ने और उनमें आत्मविश्वास विकसित करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमती ने बताया कि सरकार का लक्ष्य महामारी से प्रभावित हर बच्चे तक सहायता पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिला प्रोबेशन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के पात्र बच्चों को समय पर लाभ उपलब्ध कराया जाए तथा नियमित फॉलोअप के माध्यम से उनके समग्र विकास को सुनिश्चित किया जाए। सरकार का मानना है कि यही बच्चे भविष्य में प्रदेश और देश के विकास की मजबूत नींव बनेंगे।






