
लखनऊ, 8 सितंबर 2026:
यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ सियासी बयानबाजी लगातार तल्ख होती जा रही है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। पिछले कई हफ्तों से लगातार अखिलेश पर निशाना साध रहे राजभर के ताजा बयान ने यूपी की सियासत में फिर गर्मी बढ़ा दी है।
मंत्री राजभर ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस को निशाने पर लिया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि अखिलेश एसी में बैठकर अपने खासमखास यूट्यूबर्स के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और अगर कोई ‘ढंग का पत्रकार’ कड़ा सवाल पूछ दे तो ‘मिसरा जी-मिसरा जी’ करने लगते हैं। राजभर ने सवाल उठाया कि क्या प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ यादव और खान साहब ही चाहिए?
सम्राट अशोक की जयंती पर छुट्टी व बौद्ध स्थलों को वर्ल्ड क्लास बनाने के वादे पर पलटवार
राजभर यहीं नहीं रुके। अखिलेश यादव की उस घोषणा पर भी उन्होंने हमला बोला जिसमें सपा सरकार बनने पर सम्राट अशोक की जयंती पर अवकाश और बौद्ध स्थलों को वर्ल्ड क्लास बनाने की बात कही गई थी। राजभर ने पलटवार करते हुए सपा शासन के दौरान कब्रिस्तानों पर सरकारी धन खर्च करने का आरोप लगाया और कहा कि सत्ता में रहते हुए बहुजन महापुरुषों के नाम पर बने जिलों और संस्थानों के नाम बदल दिए गए।
उन्होंने अपने पोस्ट में भीम नगर, फुले नगर, कांशीराम नगर, रमाबाई नगर और संत रविदास नगर के नाम बदले जाने का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही राजभर ने आरोप लगाया कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम वाली योजनाओं को भी हटाया गया।
क्या मित्र अखिलेश यादव जी,
एसी में बैठ के अपने खासम-खास यूट्यूबर्स के साथ पीसी करते है और गलती से कोई ढ़ंग का पत्रकार कड़ा सवाल पूछ दें तो 'मिसरा जी-मिसरा जी' करने लगते हैं। क्या पीसी में भू सिर्फ यादव जी और ख़ान साहब ही चाहिए क्या?
कल की आपकी पीसी देखी। इसमें बहुत लंबा चौड़ा…
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) September 8, 2026
सबसे तीखा हमला उन्होंने आजम खान को लेकर किया। राजभर ने अखिलेश से सवाल किया कि जब आजम खान बाबा साहब की प्रतिमा का मजाक उड़ा रहे थे तब वह मंच पर बैठे क्या कर रहे थे। दरअसल, राजभर लंबे समय से अखिलेश यादव और सपा पर हमलावर हैं। उनके बयानों में अब राजनीतिक आरोपों के साथ व्यक्तिगत तंज भी लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
दूसरी ओर अखिलेश यादव फिलहाल राजभर के हमलों को बहुत ज्यादा तवज्जो देते नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले राजभर बनाम अखिलेश की जुबानी जंग क्या रंग दिखाती है यह देखने वाली बात होगी। खासकर आजमगढ़ जैसे सपा के मजबूत गढ़ और पिछड़े-दलित वोटों के समीकरण को लेकर दोनों खेमों की बयानबाजी आने वाले दिनों में यूपी की चुनावी सियासत को और गरमा सकती है।






