
लखनऊ, 9 सितंबर 2026:
यूपी में राजस्व अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर योगी सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम में लापरवाही और उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों पर राजस्व परिषद ने बड़ी कार्रवाई की है। निर्धारित समय सीमा में राजस्व वादों के निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर पांच तहसीलदारों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यह कार्रवाई प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की तहसीलवार और अधिकारीवार गहन समीक्षा के बाद की गई है। राजस्व परिषद के इस एक्शन ने साफ कर दिया है कि लंबित मामलों को लेकर अब महज समीक्षा और चेतावनी से काम नहीं चलेगा।
इन पांच तहसीलदारों पर गिरी गाज
निलंबित किए गए अधिकारियों में अमित यादव, तहसीलदार संडीला, हरदोई, कृष्ण कुमार मिश्रा, तहसीलदार देवरिया, सौरभ कुमार, तहसीलदार जौनपुर, रंजन वर्मा, तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या एवं सम्प्रति तहसीलदार गाजीपुर तथा अलख शुक्ला, तहसीलदार प्रतापगढ़ शामिल हैं।
इससे पहले 1 सितंबर को भी चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया जा चुका है। यानी राजस्व अदालतों में लंबित मामलों को लेकर सरकार का एक्शन लगातार आगे बढ़ रहा है।
13 अफसरों को कारण बताओ नोटिस
लापरवाही के आरोप में चंद्रशेखर वर्मा तहसीलदार गोरखपुर, गोपाल जी नायब तहसीलदार कुशीनगर, रविरंजन कश्यप तहसीलदार जौनपुर, राकेश कुमार तहसीलदार बलरामपुर, कविता ठाकुर तहसीलदार गोंडा, देवानन्द तिवारी तहसीलदार फिरोजाबाद, स्नेहल वर्मा नायब तहसीलदार लखनऊ, राहुल सिंह तहसीलदार अमेठी, अनिल कुमार तहसीलदार प्रतापगढ़, यजुवेन्द्र सिंह नायब तहसीलदार लखनऊ, सुखवीर सिंह नायब तहसीलदार लखनऊ, रमाशंकर मिश्रा नायब तहसीलदार रायबरेली और शार्द सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें कई अधिकारी अपने पूर्व और वर्तमान पदस्थापन के साथ सूचीबद्ध हैं। राजस्व परिषद ने इनके खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जवाबदेही तय होने के बाद आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद तेज हुआ एक्शन
मुख्यमंत्री ने 29 अगस्त को राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। समीक्षा के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि राजस्व मामलों का निर्धारित समय सीमा में हर हाल में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए। इन्हीं निर्देशों के बाद राजस्व परिषद ने अधिकारियों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा तेज कर दी है। परिषद ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई एक बार की कवायद नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
लापरवाही मिली तो कार्रवाई तय
राजस्व परिषद का संदेश बेहद स्पष्ट है कि राजस्व अदालतों में लंबित मामलों के निस्तारण में सुस्ती अब बर्दाश्त नहीं होगी। अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने या कार्यों में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ बिना शिथिलता के नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य राजस्व मामलों में फंसे किसानों और आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। ऐसे में तहसील स्तर पर लंबित वादों को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का सिलसिला आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत हैं।






