
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 9 सितंबर 2026ः
दिल्ली में पांच मंजिला जर्जर बिल्डिंग गिरने से मलबे में दबकर सात छात्रों की मौत के बाद उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जिला प्रशासन जागा है। यहां ऐसे खतरों को भांपते हुए और लोगों की जान बचाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। जिले भर में जर्जर और असुरक्षित भवनों का सर्वेक्षण कराया जाएगा। फिर उसका तकनीकी परीक्षण होगा। किसी भी भवन को जर्जर या ‘गिरासू’ घोषित करने से पहले उसके सभी तकनीकी और संरचनात्मक पहलुओं की गहन जांच की जाएगी।
डीएम डॉ. आशीष चौहान ने वर्चुअल बैठक के जरिए सभी एसडीएम, नगर निगम और नगर पालिका परिषदों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जर्जर भवनों का प्राथमिकता के आधार पर सर्वे कराने को कहा। सर्वे के दौरान भवन की मौजूदा स्थिति, संरचनात्मक सुरक्षा और आसपास रहने वाले लोगों के लिए संभावित खतरे का भी आकलन किया जाएगा। उन्होंने नगर निगम, नगर पालिका परिषदों, लोक निर्माण विभाग और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को विशेषज्ञ तकनीकी टीमें गठित करने के निर्देश दिए हैं।
इन टीमों के माध्यम से चिह्नित भवनों का तकनीकी एवं संरचनात्मक परीक्षण कराया जाएगा, ताकि भवन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने कहा कि जर्जर भवनों को ‘गिरासू’ घोषित करने की कार्रवाई केवल तकनीकी रिपोर्ट और सभी विधिक पहलुओं की जांच के बाद ही की जाए। प्रशासन का उद्देश्य कार्रवाई के साथ यह सुनिश्चित करना भी है कि किसी भवन के संबंध में बिना पर्याप्त तकनीकी परीक्षण के निर्णय न लिया जाए।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संवेदनशील व अत्यधिक जर्जर भवनों के मामले में विशेष सतर्कता बरतते हुए आवश्यकता के अनुसार तत्काल सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं, ताकि संभावित दुर्घटना और जनहानि को समय रहते रोका जा सके। उन्होंने सर्वेक्षण और चिह्नीकरण की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने व सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।






