Lucknow City

फिर गरजेगा बुलडोजर! कोर्ट के आसपास 72 अवैध कब्जों पर एक्शन तय, वकीलों के चैंबर भी निशाने पर

लखनऊ के कैसरबाग क्षेत्र में 71 अवैध निर्माण पहले ही ढहाए जा चुके, अब बचे 72 कब्जों पर पांच हफ्ते में चलेगा अभियान, आम लोगों के रास्ते रोकने वालों को आखिरी मौका, 26 अक्टूबर को हाईकोर्ट में अगली सुनवाई

लखनऊ, 13 सितंबर 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ के कैसरबाग इलाके में रहने और रोजाना आने-जाने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। जिला एवं सत्र न्यायालय और कलेक्ट्रेट के आसपास सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों पर एक बार फिर बुलडोजर चलने की तैयारी है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बचे हुए 72 अवैध निर्माणों को हटाने के लिए पांच हफ्ते का समय दिया है। इन कब्जों में वकीलों के चैंबर भी शामिल हैं।

इससे पहले कोर्ट के आदेश पर दो चरणों में 71 अवैध निर्माण हटाए जा चुके हैं। पहले चरण में 14 और दूसरे चरण में 57 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। इसके बावजूद कोर्ट ने माना कि इलाके में अतिक्रमण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मामले की अगली सुनवाई अब 26 अक्टूबर को होगी।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने अतिक्रमण हटाने की मांग से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। सुनवाई में नगर निगम के जोन-1 के जोनल अधिकारी ने हटाए गए अतिक्रमण की तस्वीरों के साथ कार्रवाई की जानकारी कोर्ट के सामने रखी। हालांकि, पीठ ने साफ किया कि अभियान अभी अधूरा है।

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72 कब्जेदारों को नोटिस, फिर टूटेंगे निर्माण

नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बचे हुए 72 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। कोर्ट के पिछले आदेश के मुताबिक उन्हें कक्ष या दुकान खाली करने अथवा उस पर कब्जा रखने का कोई वैध दावा होने पर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाना है।

यदि कब्जेदार ऐसा करने में विफल रहते हैं तो अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जा सकता है। नए नोटिस जारी करने और जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करने के निर्देश भी दिए गए थे। सार्वजनिक सूचना की स्थिति में कम से कम दस दिन का समय देने को कहा गया था।

वकीलों के विरोध की आशंका, पुलिस रहेगी साथ

नगर निगम ने अभियान के दौरान पर्याप्त प्रशासनिक और पुलिस सहायता की मांग की है। अधिकारियों को आशंका है कि कार्रवाई के दौरान वकीलों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त, डीएम और नगर आयुक्त को आपस में समन्वय बनाकर नगर निगम की टीम को पर्याप्त पुलिस और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

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कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि जिला एवं सत्र न्यायालय, पुराने हाईकोर्ट परिसर, कलेक्ट्रेट, राजस्व बोर्ड, पुराने सदर तहसील परिसर, उप रजिस्ट्रार कार्यालय, आयुक्त कार्यालय, रेजिडेंसी पावर सब स्टेशन, बलरामपुर अस्पताल और कैसरबाग बस स्टेशन के आसपास सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण है।

यानी मामला सिर्फ अवैध निर्माण हटाने का नहीं अपितु उन रास्तों को आम लोगों के लिए फिर से खोलने का है जहां कब्जे के कारण पैदल चलने वालों और वाहन चालकों को परेशानी होती है। अब देखना होगा कि अगले पांच हफ्तों में प्रशासन 72 बचे कब्जों पर कितना प्रभावी अभियान चला पाता है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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