
लखनऊ, 14 सितंबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में पंचायत सहायकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदेशभर से आए हजारों पंचायत सहायक कई दिनों से ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हैं। बारिश और तेज धूप भी आंदोलनकारियों के हौसले नहीं डिगा पा रही है। उन्हें विभिन्न दलों का पूरा समर्थन भी मिल रहा है। सोमवार को आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह धरनास्थल पहुंचे और पंचायत सहायकों के आंदोलन को पार्टी की ओर से पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया।
आंदोलनकारी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए संजय सिंह ने उनकी मांगों के समर्थन में पत्र सौंपा और प्रदेश की सरकार के साथ केंद्र की मोदी सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि गांवों में 29 विभागों की रीढ़ बनकर काम करने वाले पढ़े-लिखे नौजवानों को महज 6 हजार रुपये मानदेय देना उनका खुला शोषण है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो नौजवान अपने गांव का टॉपर रहा हो, उसे मजदूरी से भी कम भुगतान कैसे दिया जा सकता है। संजय सिंह ने पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की।
मानदेय की विसंगति पर हमला बोलते हुए AAP सांसद ने कहा कि विधायक या सांसद शपथ लेते ही लाखों रुपये का वेतन, गाड़ी भत्ता, मेडिकल सुविधा और करोड़ों की निधि पाने लगता है। उन्होंने कहा कि 40 दिन के लिए भी जनप्रतिनिधि बनने पर आजीवन पेंशन मिलती है लेकिन 40 साल तक जनता की सेवा करने वाले कर्मचारियों की पेंशन भाजपा सरकार ने छीन ली। पंचायत सहायकों को 6 हजार रुपये देने पर उन्होंने भाजपा नेताओं और अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा, ‘अगर 6 हजार रुपये पर्याप्त हैं तो भाजपा के मंत्री, विधायक और डीपीआरओ अपने बच्चों को 6 हजार रुपये में पंचायत सहायक की नौकरी कराकर दिखाएं।’

आप नेता ने सरकार के रोजगार और निवेश संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने हर साल 2 करोड़ नौकरियों और उत्तर प्रदेश में 13 लाख नौकरियों के वादे का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने यूपी के 90 लाख करोड़ रुपये के कथित इन्वेस्टमेंट समिट के दावे को भी झूठा बताया। उनका आरोप था कि बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों के कर्ज माफ करने के लिए सरकारी खजाना खुला रहता है, लेकिन युवाओं को रोजगार देने के बजाय अग्निवीर जैसी चार साल की योजना दी जा रही है।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। संजय सिंह ने दावा किया कि भाजपा सरकार में देशभर में एक लाख सरकारी स्कूल बंद हुए। 1.30 लाख स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक है और लाखों स्कूलों में बेटियों के लिए टॉयलेट व बिजली तक की व्यवस्था नहीं है।

धरनारत पंचायत सहायकों का हौसला बढ़ाते हुए संजय सिंह ने आरोप लगाया कि आंदोलन दबाने के लिए अधिकारियों के जरिए दबाव बनाया जा रहा है और लाठी-मुकदमों से डराने की कोशिश हो रही है। उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों और जेल में बिताए समय का जिक्र करते हुए कहा कि सच की आवाज दबाई नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि 58 हजार पंचायत सहायक जेल जाने को तैयार हो गए तो सरकार के पसीने छूट जाएंगे। उन्होंने भगत सिंह से प्रेरणा लेते हुए शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से 30 हजार रुपये मानदेय की मांग पर डटे रहने का आह्वान किया।
संजय सिंह ने भरोसा दिलाया कि आम आदमी पार्टी पंचायत सहायकों के संघर्ष में हर कदम पर साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि संसद का आगामी सत्र शुरू होते ही पंचायत सहायकों के मानदेय और अधिकारों की आवाज सर्वोच्च सदन में मजबूती से उठाई जाएगी। इस दौरान अयोध्या प्रांत अध्यक्ष विनय पटेल, निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह, महासचिव दिनेश सिंह पटेल, मनोज मिश्रा, वैभव प्रकाश, लखनऊ जिलाध्यक्ष इरम रिजवी, सुरभि, प्रेरणा, प्रशांत यादव, नूर सिद्दीकी, वंश बहादुर, ललित वाल्मीकि समेत पार्टी के कार्यकर्ता मौजूद थे।






