
बिजनेस डेस्क, 24 सितंबर 2026:
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 600 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 23,250 के स्तर के नीचे चला गया। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बिकवाली का दबाव ज्यादा रहा। इसका असर व्यापक बाजार पर भी दिखा और निफ्टी मिडकैप 100 व निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब 1-1 फीसदी नीचे आ गए।
74,000 के करीब पहुंचा सेंसेक्स
Sensex Crash : सुबह 9:36 बजे सेंसेक्स 526.98 अंक यानी 0.70 फीसदी गिरकर 74,301.27 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी में भी 178 अंक यानी 0.76 फीसदी की गिरावट रही और यह 23,268.80 के स्तर पर आ गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स एक समय 600 अंक से ज्यादा नीचे चला गया था।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में ज्यादा बिकवाली
NSE Nifty : गुरुवार के शुरुआती कारोबार में सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में नजर आए। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में करीब 2 फीसदी की गिरावट रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा और दोनों इंडेक्स करीब 1 फीसदी नीचे कारोबार करते दिखे।
बॉन्ड यील्ड में उछाल से बढ़ी बाजार की चिंता
Share Market में गिरावट की एक बड़ी वजह बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी को माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक यील्ड 19 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए फिक्स्ड इनकम वाले विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इससे इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसका असर खास तौर पर उन शेयरों पर पड़ सकता है जिनकी वैल्यूएशन ब्याज दरों और आने वाले समय की कमाई की उम्मीदों से जुड़ी होती है।
फेड की ब्याज दरों को लेकर बदला माहौल
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों में बदलाव भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर डाल रहा है। ऊंची ब्याज दरों की संभावना बढ़ने पर दुनियाभर में जोखिम वाले निवेश पर दबाव बन सकता है। भारतीय बाजार पर भी इसका असर पड़ता है, क्योंकि ग्लोबल ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव विदेशी निवेशकों के रुख को प्रभावित कर सकता है।
कच्चा तेल महंगा होने से बढ़ी चिंता
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारत के लिए अहम संकेत है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में क्रूड ऑयल महंगा होने पर आयात लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अर्थव्यवस्था के साथ कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों की आगे की दिशा पर बनी हुई है।
एशियाई बाजारों में भी हलचल
भारतीय बाजार को ग्लोबल संकेतों से भी सपोर्ट नहीं मिला। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 0.2 फीसदी नीचे था। जापान का टॉपिक्स 0.1 फीसदी ऊपर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 0.7 फीसदी, हांगकांग का हेंगसेंग 0.4 फीसदी और शंघाई कंपोजिट 0.8 फीसदी नीचे रहा। यूरो स्टॉक्स फ्यूचर्स में भी 0.3 फीसदी की गिरावट थी।






