Indian Stock Market : अमेरिकी चुनावी नतीजों से शेयर बाजार में उछाल, सेंसेक्स 1,400 अंक चढ़ा
Crude Oil Prices : कच्चे तेल की कीमतें दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचीं, रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ

बिजनेस डेस्क, 5 नवंबर 2026:
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत जबरदस्त तेजी के साथ हुई। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद दुनियाभर के बाजारों में खरीदारी का माहौल बना। इसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,403.71 अंक की छलांग लगाकर 78,689.87 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 378.85 अंक की बढ़त के साथ 24,340.40 पर कारोबार करता दिखा।
GIFT Nifty ने पहले ही दे दिए थे तेजी के संकेत
घरेलू बाजार खुलने से पहले ही GIFT Nifty में मजबूत बढ़त देखने को मिली थी। एनएसई आईएफएससी पर यह 377 अंक यानी 1.57 फीसदी चढ़कर 24,327 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे भारतीय बाजार में गैप-अप ओपनिंग के संकेत मिल गए थे। बाजार में तेजी के बीच रुपये को भी मजबूती मिली। शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे मजबूत होकर 94.32 के स्तर पर पहुंच गया।
एशियाई बाजारों से वॉल स्ट्रीट तक दिखी तेजी
भारतीय बाजार के साथ एशियाई शेयर बाजारों में भी खरीदारी का रुख रहा। जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख शेयर सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। इसका असर एमएससीआई एशिया पैसिफिक इंडेक्स पर भी पड़ा, जो 0.3 फीसदी ऊपर पहुंच गया। इससे पहले अमेरिकी बाजार में भी जोरदार तेजी देखने को मिली थी। एसएंडपी 500 इंडेक्स 1.6 फीसदी चढ़ा, जो पिछले तीन महीनों में इसकी सबसे बड़ी एक दिन की बढ़त रही। वहीं टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों पर आधारित नैस्डैक 100 में 0.9 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से निवेशकों को मिली राहत
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत के बाद वॉल स्ट्रीट में निवेशकों का उत्साह बढ़ा। बाजार में तेजी के पीछे ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर बनी उम्मीदों को भी अहम वजह माना जा रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है। इस संभावना के बीच कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। तेल के दाम दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में कमी से भारतीय बाजार को सहारा मिला, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।






