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Sitapur News : फर्जी पत्रावली से सरकारी जमीन हड़पने का खेल, पेशकार समेत चार पर FIR

ग्राम समाज की जमीन निजी व्यक्ति के नाम कराने का मामला उजागर, अभिलेखों में पन्ने बदलने से लेकर पत्रावलियां गायब करने तक की गड़बड़ी सामने आई, जांच समिति की रिपोर्ट के बाद शहर कोतवाली में दर्ज हुआ मुकदमा, राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी की पूरी प्रक्रिया की जांच शुरू

सीतापुर, 28 सितंबर 2026:

यूपी के सीतापुर में ग्राम समाज की सरकारी जमीन को फर्जी चकबंदी पत्रावलियों के सहारे निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराने का मामला सामने आया है। जांच में राजस्व अभिलेखों से छेड़छाड़, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और पुरानी वाद पत्रावली गायब करने की बात सामने आने के बाद तत्कालीन तहसीलदार सदर के पेशकार समेत चार लोगों के खिलाफ शहर कोतवाली में FIR दर्ज कराई गई है।

पेशकार का साथ देने वाले तीन अन्य कर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

मामले में तत्कालीन तहसीलदार सदर के पेशकार विपिन यादव, अभिलेखागार से जुड़े कोमल कटियार, कलेक्ट्रेट के मुख्य राजस्व लेखाकार श्याम बाबू मिश्रा और सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक राकेश वर्मा को आरोपी बनाया गया है। प्रभारी अधिकारी अभिलेखागार (माल) एवं अतिरिक्त मजिस्ट्रेट द्वितीय सुभाष चन्द्र ने तहरीर देकर केस दर्ज कराया है।

गाटा संख्या 19 और 115 में सामने आया फर्जीवाड़ा

जिलाधिकारी के निर्देश पर अभिलेखागार में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए समिति गठित की गई थी। 29 जुलाई को सामने आई समिति की रिपोर्ट में ग्राम सरैया मल्हुई, परगना खैराबाद की श्रेणी-3 की सरकारी जमीन से जुड़ा मामला पकड़ा गया। जांच में गाटा संख्या 19 और 115 को बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के जमलापुर निवासी राजू सिंह के नाम दर्ज किए जाने की बात सामने आई। जांच के मुताबिक तहसील के आर-6 अभिलेख में यह नाम फर्जी पत्रावलियों के आधार पर दर्ज कराया गया था। आरोप है कि सरकारी जमीन का रिकॉर्ड बदलने के लिए चकबंदी न्यायालय की फर्जी पत्रावलियों का सहारा लिया गया।

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अभिलेखागार में पन्ने बदलने का भी आरोप

जांच समिति ने अभिलेखागार की बस्ता सूची में पृष्ठ बदलने, फर्जी पत्रावलियां दाखिल कराने और उन्हीं के आधार पर नकल जारी किए जाने जैसी गड़बड़ियां भी पकड़ीं। इससे सरकारी जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।

2008 की वाद पत्रावली भी गायब मिली

जांच में ग्राम क्योंटाना हरदोपट्टी से जुड़ी वर्ष 2008 में निर्णीत वाद संख्या 225 की पत्रावली भी गायब होने की बात सामने आई। आरोप है कि इसे बस्ता सूची और नकल पंजी से काट दिया गया था। तहरीर में चारों आरोपियों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस अब सरकारी जमीन को निजी नाम दर्ज कराने, कथित फर्जी पत्रावलियों के इस्तेमाल और पुरानी पत्रावली गायब किए जाने से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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