UP Election 2027: सीटों पर खींचतान के बीच अखिलेश का ‘जीत’ वाला संदेश, सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर दिया बड़ा संकेत
सपा मुखिया बोले- बात सीट की नहीं, जीत की है, साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई से लेकर संविधान और आरक्षण की रक्षा तक गिनाए गठबंधन के बड़े मुद्दे, कांग्रेस में बदलाव के बीच बढ़ी सियासी हलचल

लखनऊ, 4 अक्टूबर 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) 2027 की सियासी बिसात बिछने के साथ ही विपक्षी गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर उठती आवाजों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर नेताओं के अलग-अलग बयानों से गठबंधन की दिशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे माहौल में रविवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सहयोगी दलों को एकजुटता का संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि उनके लिए सीटों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण गठबंधन की चुनावी जीत है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए गठबंधन के सहयोगियों को संदेश दिया। उन्होंने लिखा, ‘मकसद जब साफ हो तो हाथ-में-हाथ होता है, निगाह मंजिल पर हो तो सफर आसान होता है।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गठबंधन में कितनी सीटें हैं या कौन सी सीट किस दल के पास जा रही है, इससे बड़ी बात यह है कि सभी दल मिलकर गठबंधन की जीत सुनिश्चित करें। उनका सीधा संदेश था- ‘बात सीट की नहीं जीत की है।’
सपा मुखिया ने गठबंधन की संभावित चुनावी लड़ाई को महज दलों की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि गठबंधन की जीत उन सभी दलों और लोगों की संयुक्त कोशिश की जीत होगी जो चाहते हैं कि साम्प्रदायिकता फिर कभी सिर न उठा सके। इसके साथ ही उन्होंने लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण की रक्षा तथा देश में सौहार्द, तरक्की और खुशहाली का माहौल बनाने को भी इस लड़ाई से जोड़ा।
सीट शेयरिंग पर बयानबाजी से बढ़ी बेचैनी
दरअसल, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार तेज हैं। दोनों दलों के नेताओं की ओर से समय-समय पर सामने आने वाले बयानों ने अटकलों को और हवा दी है। ऐसे में अखिलेश का ताजा बयान सीटों के सवाल से ज्यादा गठबंधन की एकजुटता और साझा चुनावी लक्ष्य पर जोर देता दिखाई दे रहा है।
मक़सद जब साफ़ हो तो हाथ-में-हाथ होता है
निगाह मंज़िल पर हो तो सफ़र आसान होता है!बात बड़ी ये नहीं है कि गठबंधन में कितनी सीटें या कौन सी सीट किसके पास जा रही है बात बड़ी ये है कि हम सबको ये सुनिश्चित करना है कि जीत गठबंधन की हो।
फिर दोहराते हैं : बात सीट की नहीं जीत की है।
ये जीत हमारे गठबंधन के दलों से बढ़कर हम सबकी उस संयुक्त कोशिश की जीत होगी जो इसलिए लगातार संघर्षरत है कि साम्प्रदायिकता फिर कभी सिर न उठा सके और लोकतंत्र-संविधान-आरक्षण पर भाजपाई आंच न आए और देश का सौहार्द फिर से खिलखिलाए, देश की तरक़्क़ी और ख़ुशहाली फिर से मुस्कुराए।
जय संविधान-जय हिंदुस्तान!
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 4, 2026
इसी बीच कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश संगठन में भी बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने अजय राय को हटाकर उनकी जगह अराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अराधना मिश्रा के अखिलेश यादव के साथ बेहतर राजनीतिक संबंध गठबंधन की संभावनाओं के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं।
हालांकि, कांग्रेस ने इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी है और हाल के दिनों में गठबंधन को लेकर उनके कुछ बयानों से सपा-कांग्रेस के बीच असहजता की चर्चा रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का ‘सीट नहीं, जीत’ वाला संदेश फिलहाल गठबंधन के भीतर उठ रही सीटों की राजनीति को साझा लक्ष्य की ओर मोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि चुनावी रणनीति आगे बढ़ने के साथ सपा और कांग्रेस सीट बंटवारे के सवाल को किस तरह सुलझाते हैं।






