Sitapur News : नैमिषारण्य में मां ललिता के दरबार में उमड़े श्रद्धालु, शक्तिपीठ से जुड़ी है सती के हृदय की मान्यता
नवरात्र के पहले दिन मंदिर में दुर्गा सप्तशती का पाठ, दूरदराज से पहुंचे भक्तों ने की पूजा अर्चना राजा विक्रमादित्य से जुड़ी है मंदिर की स्थापना की कथा, कन्या भोज कराने की भी है मान्यता

सीतापुर, 11 अक्टूबर 2026:
यूपी के सीतापुर जिले के नैमिषारण्य में शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां ललिता देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही दूरदराज के इलाकों से भक्त दर्शन पूजन के लिए पहुंचते रहे। मंदिर परिसर में दुर्गा सप्तशती का पाठ होता रहा। श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। नैमिषारण्य का यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था के साथ अपनी पौराणिक मान्यताओं के लिए भी खास पहचान रखता है।
सती के हृदय से जुड़ी है मान्यता
नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी मंदिर को देश के 52 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, माता सती का हृदय इसी स्थान पर गिरा था। इसी वजह से यह मंदिर ललिता देवी शक्तिपीठ के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां ललिता पूरी करती हैं।

राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था मंदिर
मंदिर की स्थापना को लेकर राजा विक्रमादित्य से जुड़ी कथा प्रचलित है। मान्यता है कि उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने यहां मंदिर बनवाया था। मंदिर में मां की प्रतिमा को प्राचीन काल से स्थापित माना जाता है। नैमिषारण्य की धार्मिक पहचान में इस मंदिर का खास स्थान है, यहां साल भर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि नवरात्र में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है।
ऋषियों की तपोभूमि से भी जुड़ा है मंदिर
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, 88 हजार ऋषियों की प्रार्थना पर मां ललिता देवी ने चक्र की गति रोककर पृथ्वी को जलमग्न होने से बचाया था। इस कथा का संबंध नैमिषारण्य की प्राचीन धार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है। मंदिर परिसर के पास एक पुराना मंदिर भी है, जिसे स्थानीय लोग मां ललिता देवी का प्राचीन मंदिर कहते हैं। यहां कामेश्वर की एक प्रतिमा भी मौजूद है, जिसका उल्लेख शाक्त परंपरा से जुड़ी मान्यताओं में मिलता है।

श्रीयंत्र की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं मां ललिता
मां ललिता को श्रीयंत्र की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। धार्मिक परंपरा में श्रीयंत्र को प्रमुख स्थान दिया गया है। मां ललिता का संबंध दस महाविद्याओं की उपासना से भी जोड़ा जाता है। नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा अर्चना होती है। पहले दिन से नवमी तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहता है। मंदिर में कन्या भोज कराने की भी परंपरा है, जिसे भक्त मनोकामना पूरी होने की आस्था से जोड़कर देखते हैं।
पूरे नवरात्र दिखता हैं आस्था का उत्सव
मंदिर के आसपास पूजन सामग्री की दुकानें लगीं हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी की गई है। सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है। यहां आसपास जिलों के साथ कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर में पूरे नवरात्र आस्था का उत्सव नजर आता है। महिलाओं पुरुषों के साथ पूरे परिवार के साथ यहां लोग माथा टेककर मां का आशीर्वाद ले रहे हैं।






