आदि कैलाश मैराथन : सीमांत संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते
देश-प्रदेश से पहुंचे प्रतिभागी उत्साह के साथ हुए शामिल, पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था होगी मजबूत, कारोबार के नए अवसर होंगे विकसित, जौलिकोंग, कुट्टी और गुंजी पर्यटन के बनेंगे प्रमुख केंद्र
योगेंद्र मलिक
आदि कैलाश, 28 अक्टूबर 2026ः
‘दी हो हल्ला’ की विशेष रिपोर्ट
हिमालय की ऊंची चोटियों, मनोरम घाटियों और आध्यात्मिक विरासत के बीच आयोजित आदि कैलाश मैराथन ने सीमांत क्षेत्र में पर्यटन विकास की नई संभावनाओं को उजागर किया है। देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सो से पहुंचे प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक इसमें हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। इस पहल से आदि कैलाश और आसपास के गांवों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर पहचान दिलाने की उम्मीद जगी है। साथ ही सीमांत क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय कारोबार के नए अवसर विकसित होने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।
धार्मिक यात्रा से आगे बढ़ेगा पर्यटन
आदि कैलाश का महत्व केवल धार्मिक पर्यटन स्थल तक सीमित नहीं है। जौलिकोंग, कुट्टी और गुंजी पर्यटन के प्रमुख केंद्र बन सकते हैं। यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक आस्था, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत भूभाग का अनूठा संगम है। यहां खेल गतिविधियों का आयोजन पर्यटन को पारंपरिक धार्मिक यात्राओं से आगे बढ़ाकर साहसिक, प्राकृतिक और अनुभव आधारित पर्यटन से जोड़ने का अवसर देता है। मैराथन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे पर्वतीय क्षेत्र की विशिष्ट पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने और नए पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
पर्यटन सचिव धीरज गर्ब्याल ने आयोजन को सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के आयोजनों से आदि कैलाश और आसपास के गांवों की पहचान व्यापक होगी व अधिक पर्यटक इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होंगे। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
जौलिकोंग, कुट्टी और गुंजी पर रहेगी नजर
आदि कैलाश यात्रा क्षेत्र में स्थित जौलिकोंग, कुट्टी और गुंजी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों और पारंपरिक जीवनशैली के लिए विशेष महत्व रखते हैं। ऊंचे पर्वतों से घिरी घाटियां, स्वच्छ वातावरण और हिमालय के मनोरम दृश्य यहां आने वाले यात्रियों को विशिष्ट अनुभव प्रदान करते हैं। इन गांवों की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय परंपराएं भी पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। जौलिकोंग के आसपास का प्राकृतिक परिवेश और पार्वती सरोवर की आध्यात्मिक महत्ता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। वहीं, कुट्टी और गुंजी में सीमांत क्षेत्र की संस्कृति, पारंपरिक स्थापत्य और स्थानीय जीवन को करीब से जानने का अवसर मिलता है।

योजनाबद्ध तरीके से इन गांवों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक खानपान और हस्तशिल्प को नया बाजार मिल सकता है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इस क्षेत्र में उत्पादित पारंपरिक अनाज, दालें, राजमा और अन्य पहाड़ी कृषि उत्पाद भी पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इन उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन पर ध्यान देकर इन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। स्थानीय व्यंजनों और पारंपरिक खानपान को पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाने से ग्रामीण उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम
भगवान शिव से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण आदि कैलाश श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है। देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दुर्गम रास्तों, ऊंचे पर्वतीय भूभाग और चुनौतीपूर्ण प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच पूरी होने वाली यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ साहस और आत्मिक अनुभव का भी माध्यम है। पार्वती सरोवर इस क्षेत्र के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। हिमालयी पर्वतों की पृष्ठभूमि में स्थित सरोवर का शांत वातावरण और धार्मिक महत्व इसे विशिष्ट बनाते हैं। यहां की प्राकृतिक छटा श्रद्धालुओं के साथ प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित करती है। इसके अलावा, व्यास घाटी में स्थित माता काली मंदिर धार्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
काली नदी के उद्गम क्षेत्र से जुड़ी भौगोलिक विशेषताएं, पर्वतीय दृश्य और स्थानीय परंपराएं इस पूरे इलाके को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को एकीकृत रूप में प्रस्तुत कर आदि कैलाश को आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए पर्यटकों की सुविधाओं, सूचना व्यवस्था और सुरक्षित आवागमन पर विशेष ध्यान देना होगा।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं
सीमांत क्षेत्रों में स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना विकास की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है। भौगोलिक दुर्गमता, लंबी दूरी और सीमित आर्थिक गतिविधियों के कारण यहां के लोगों को आजीविका के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर होम स्टे, होटल, भोजनालय, परिवहन, स्थानीय गाइड और पोर्टर सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। स्थानीय युवाओं को इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ने की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। मैराथन जैसे आयोजनों से प्रतिभागियों के आवास, भोजन, परिवहन और अन्य आवश्यकताओं के कारण स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिल सकता है।
यदि इस तरह के आयोजन नियमित रूप से हों तो महिला स्वयं सहायता समूहों, छोटे उद्यमियों और स्थानीय व्यापारियों को नए अवसर मिल सकते हैं। स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष बाजार विकसित करने, हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने और पारंपरिक व्यंजनों का प्रचार करने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दी जा सकती है। हालांकि इन संभावनाओं को वास्तविक रोजगार में बदलने के लिए कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, विपणन और परिवहन सुविधाओं का विस्तार आवश्यक होगा।
पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास जरूरी
हिमालयी पारिस्थितिकी की संवेदनशीलता को देखते हुए आदि कैलाश में पर्यटन विकास की रणनीति पर्यावरण संरक्षण पर आधारित होनी चाहिए। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ कचरा प्रबंधन, जल स्रोतों की स्वच्छता, प्राकृतिक पगडंडियों का संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता की सुरक्षा जैसी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। इसलिए प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करने, पर्यटकों को जागरूक बनाने और स्थानीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जरूरत है। इसके साथ सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार व्यवस्था, सुरक्षित ठहराव स्थलों और आपातकालीन सहायता को मजबूत करना भी जरूरी है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में मैराथन और अन्य साहसिक गतिविधियों के दौरान चिकित्सा सहायता, मौसम संबंधी जानकारी और सुरक्षा इंतजामों को प्राथमिकता देनी होगी।

निरंतर प्रयासों से साकार होगी विकास की उम्मीद
आदि कैलाश मैराथन ने सीमांत क्षेत्र में पर्यटन विकास की संभावनाओं को सामने लाने का अवसर दिया है। इसकी वास्तविक सफलता प्रतिभागियों की संख्या या आयोजन की भव्यता से नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को मिलने वाले दीर्घकालिक लाभ से तय होगी। सरकार, पर्यटन विभाग, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण समुदायों के बीच समन्वय से इस पहल को स्थायी विकास का माध्यम बनाया जा सकता है। यदि नियमित आयोजन, स्थानीय युवाओं का प्रशिक्षण और ग्रामीण उत्पादों के विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तो आदि कैलाश क्षेत्र रोजगार व स्वरोजगार के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है।
हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता, पार्वती सरोवर की धार्मिक महत्ता और जौलिकोंग, कुट्टी और गुंजी व व्यास से काली माता का धाम व काली नदी का उद्गम यहा की सांस्कृतिक विशिष्टता को एक साथ जोड़कर सीमांत क्षेत्र को नई पहचान दी जा सकती है। पर्यटन का लाभ गांवों तक पहुंचना और प्रकृति का संरक्षण सुनिश्चित करना ही इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।






