Ayodhya Deepotsav : माता-पिता व दोस्तों की बातों ने जगाई ललक, शिकागो से पॉल-शेल्बे पहुंचे रामनगरी
दीपोत्सव में सरयू आरती से लेकर राम की पैड़ी पर दीपदान तक बने उत्सव का हिस्सा, अमेरिका में सुनी थी अयोध्या के इतिहास और धार्मिक महत्ता की चर्चा

अयोध्या/लखनऊ, 8 नवंबर 2026:
अमेरिका के शिकागो में माता-पिता से अयोध्या की महिमा सुनी थी। दोस्तों से रामनगरी के इतिहास और धार्मिक महत्व के किस्से जाने थे। मन में जगी इसी जिज्ञासा ने पॉल और उनकी दोस्त शेल्बे को सात समंदर पार से अयोध्या खींच लिया। इस बार दीपोत्सव पर दोनों ने रामनगरी की भव्यता को करीब से देखने के साथ सरयू आरती में शामिल होकर और राम की पैड़ी पर स्थानीय लोगों के साथ दीये जलाकर यहां की आस्था और परंपरा को भी महसूस किया।
पॉल के लिए अयोध्या की यह यात्रा माता-पिता से सुनी बातों को अपनी आंखों से देखने का अवसर बनी। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता अक्सर अयोध्या के बारे में बताते थे। उनसे इस प्राचीन नगरी की धार्मिक महत्ता और भगवान राम से जुड़े प्रसंगों के बारे में काफी कुछ सुना था। इन्हीं बातों ने उनके मन में अयोध्या को जानने और यहां आने की इच्छा पैदा की। अब तक जिस रामनगरी की पहचान उनके लिए माता-पिता की बातों तक सीमित थी उसे इस बार उन्होंने प्रत्यक्ष अनुभव किया।
वहीं, शेल्बे के मन में अयोध्या आने की इच्छा अपने दोस्तों से मिली जानकारी के बाद जगी। उन्होंने बताया कि अमेरिका में उनके दोस्तों ने रामनगरी के इतिहास और धार्मिक महत्व की काफी प्रशंसा की थी। अयोध्या की गौरवशाली परंपराओं के बारे में सुनकर वह भी इस नगरी को देखने के लिए उत्सुक हो गईं। आखिरकार उन्होंने अपने दोस्त पॉल के साथ यहां आने का फैसला किया।
दोनों की यात्रा का सबसे खास पड़ाव सरयू आरती रहा। सरयू तट पर आरती में शामिल होकर उन्होंने आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। इसके बाद राम की पैड़ी पहुंचकर स्थानीय लोगों के साथ दीप जलाए और दीपोत्सव की खुशियों में शामिल हुए। उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी खास रहा क्योंकि जिस उत्सव और परंपरा के बारे में अब तक अमेरिका में सुना था उसी का हिस्सा बनने का मौका यहां मिला।
पॉल और शेल्बे ने बताया कि उन्हें अमेरिका में अयोध्या के दीपोत्सव की भव्यता के बारे में भी जानकारी मिली थी। उन्होंने सुना था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान राम के अनन्य भक्त हैं और अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत कराने में उनकी अहम भूमिका रही है। भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति में मनाए जाने वाले इस उत्सव को देखने की उत्सुकता भी उन्हें यहां तक ले आई।
अलग-अलग लोगों से अयोध्या की महिमा सुनकर रामनगरी पहुंचे दोनों दोस्तों के लिए यह यात्रा यादगार बन गई। दीपों की रोशनी, सरयू आरती और स्थानीय लोगों के साथ दीपदान ने उनके लिए अयोध्या को महज सुनी-सुनाई नगरी से जीवंत अनुभव में बदल दिया।






