Uttarakhand

अंकिता भंडारी केस में महापंचायत, कहा…इंसाफ तभी जब वीआईपी आरोपी गिरफ्तार हों

पूर्व सीएम हरीश रावत समेत इंडी गठबंधन के दल व कई संगठनों ने की भागीदारी, अंकिता के माता-पिता पहुंचे, पांच प्रस्ताव पास हुए, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग रखी

देहरादून, 8 फरवरी 2026:

राजधानी देहरादून में परेड ग्राउंड के बाहर रविवार को अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों और जन सरोकारों से जुड़े कई संगठन के साथ अंकिता के माता-पिता भी शामिल हुए। सभी ने अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को मजबूती से उठाया।

महापंचायत में वक्ताओं ने अंकिता हत्याकांड में शामिल बताए जा रहे वीआईपी की गिरफ्तारी की मांग को प्रमुख मुद्दा बनाया। अलग-अलग संगठनों के पदाधिकारियों ने बारी-बारी से अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन उत्तराखंड महिला मंच की पदाधिकारी निर्मला बिष्ट ने किया। महापंचायत में पांच प्रस्ताव पास किए गए।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि मौजूदा जांच का मकसद केवल वीआईपी को बचाना है। उन्होंने साफ कहा कि इंडिया गठबंधन इस जांच को पूरी तरह खारिज करता है। उनका कहना था कि जन भावनाओं के मुताबिक इस पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से कराई जानी चाहिए। रावत ने आरोप लगाया कि शिकायत के आधार पर चल रही जांच महज दिखावा है।

ये भी पढ़ें:

Ankita Bhandari Case Mahapanchayat Call for Justice (1)

Advertisement

उन्होंने आगे कहा कि जिस शिकायतकर्ता के सहारे जांच आगे बढ़ाई जा रही है, वह सरकार द्वारा प्रायोजित है और उसका अंकिता के परिवार से कोई सीधा संबंध नहीं है। रावत ने राज्य में महिलाओं की बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंकिता हत्याकांड के बाद भी प्रदेश में महिलाओं के साथ लूट, दुर्व्यवहार और दुष्कर्म की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिनमें कामकाजी महिलाएं भी शामिल हैं।

हरीश रावत ने कहा कि हाल के दिनों में देहरादून जिले में ही तीन महिलाओं की हत्या हुई है। उनका कहना था कि यह हालात बताते हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह कमजोर हो चुकी है और सरकार महिलाओं की सुरक्षा करने में नाकाम साबित हो रही है।

भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा सरकार शुरू से ही वीआईपी को बचाने की कोशिश करती रही है। उनका आरोप था कि जांच के दौरान जानबूझकर एक ऐसे व्यक्ति को शिकायतकर्ता बनाया गया, जिसका न तो अंकिता के परिवार से कोई रिश्ता है और न ही वह इस मामले का पीड़ित या पक्षकार है।

मैखुरी ने कहा कि पूरी प्रक्रिया का मकसद सीबीआई जांच के नाम पर वीआईपी को राहत पहुंचाना है।
महापंचायत के जरिए संगठनों ने साफ संदेश दिया कि जब तक अंकिता को पूरा इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

ये भी पढ़ें  गोलियों की तड़तड़ाहट से दहला देहरादून... वाइन शॉप के बाहर फायरिंग, दो लोग घायल

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
Secret Link