Uttarakhand

फूलों से महके चारधाम, शीतकालीन विदाई की तैयारी तेज, केदारनाथ-यमुनोत्री में भव्य सजावट

मंदिरों के प्रांगण से लेकर प्रवेश द्वार तक आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं को कर रही आकर्षित,  10 को गंगोत्री धाम व  11 नवंबर को बाबा केदार के कपाट होंगे बंद 

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 8 नवंबर 2026: 

दीपावली के उल्लास और आस्था के बीच उत्तराखंड के चारधाम इन दिनों फूलों की खुशबू से महक रहे हैं। बाबा केदारनाथ से लेकर मां गंगा और मां यमुना के धाम तक रंग-बिरंगे फूलों से भव्य सजावट की गई है। मंदिरों के प्रांगण से लेकर प्रवेश द्वार तक फूलों की आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनी हुई है। वहीं, चारधाम यात्रा के समापन के साथ ही अब धामों में शीतकालीन विदाई की धार्मिक तैयारियां भी तेज हो गई हैं।

केदारनाथ धाम को करीब 18 से 20 क्विंटल विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। दीपावली के अवसर पर बाबा केदार का दरबार और मंदिर परिसर फूलों से सुसज्जित होकर अलौकिक छटा बिखेर रहा है। इस बीच शनिवार को क्षेत्रपाल एवं धाम के रक्षक भगवान भुकुंड भैरवनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए। इसके साथ ही बाबा केदारनाथ के कपाट बंद करने की विधिवत धार्मिक प्रक्रिया भी शुरू हो गई। आगामी 11 नवंबर को विधि-विधान के साथ केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होंगे। बीकेटीसी सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने श्रद्धालुओं को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए धाम की मर्यादा और धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील की।

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गंगोत्री में पांच व यमुनोत्री में तीन क्विंटल फूलों से सजे मंदिर

उधर, उत्तरकाशी के गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी दीपावली और शीतकालीन कपाट बंद होने से पहले विशेष सजावट की गई है। गंगोत्री मंदिर को करीब पांच क्विंटल और यमुनोत्री मंदिर को तीन क्विंटल रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। फूलों से सजे मंदिरों की सुंदरता श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। दोनों धामों में अब कपाट बंद होने से पहले होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

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गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को बंद किए जाएंगे। इसके बाद मां गंगा की उत्सव डोली पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उनके शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव पहुंचेगी। वहीं, यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को भैयादूज के अवसर पर बंद होंगे। इसके बाद मां यमुना की उत्सव डोली खरसाली स्थित मंदिर पहुंचेगी।

शीतकाल में भी होंगे मां गंगा-यमुना के दर्शन

चारधाम के कपाट बंद होने का अर्थ श्रद्धालुओं के लिए दर्शन परंपरा का विराम नहीं है। शीतकाल में मां गंगा के दर्शन मुखबा और मां यमुना के दर्शन खरसाली में होंगे। इसी तरह केदारनाथ धाम के शीतकालीन प्रवास के दौरान बाबा केदार की पूजा-अर्चना ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में होगी।

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