Uttar Pradesh

यूपी विधानसभा में बजट सत्र पर गरमाई बहस… कर्ज, रोजगार व बिजली मुद्दे पर हंगामा

योगी के संबोधन से पूर्व विपक्ष ने सरकार को घेरा, सत्ता पक्ष ने आंकड़ों के साथ दिया जवाब, सरकार को आज पेश करनी है कैग रिपोर्ट

लखनऊ, 20 फरवरी 2026:

उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को जमकर बहस और हंगामा देखने को मिला। सदन में प्रदेश के कर्ज, रोजगार, स्वास्थ्य व्यवस्था, बिजली और किसानों से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने रहे। कार्यवाही के दौरान कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई।

कर्ज और प्रति व्यक्ति बोझ पर टकराव

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने प्रदेश पर बढ़ते कर्ज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य पर नौ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज हो चुका है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने शुरुआत में आपत्ति जताई, लेकिन बाद में कर्ज की स्थिति स्वीकार की गई।

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कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने भी सरकार के प्रति व्यक्ति आय के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति लगभग 37,500 रुपये का कर्ज है। उन्होंने बताया कि 2020-21 में कर्ज करीब 5.64 लाख करोड़ था, जो अब बढ़कर 8.46 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।

रोजगार और पलायन पर विपक्ष का हमला

सपा विधायकों ने बेरोजगारी और पलायन का मुद्दा जोरशोर से उठाया। विधायक संग्राम सिंह ने कहा कि रोजगार मेलों के दावों के बावजूद युवा दूसरे राज्यों में नौकरी के लिए जा रहे हैं। इस पर मंत्री अनिल राजभर ने जवाब दिया कि अब यूपी के कामगारों की मांग देश और विदेश में बढ़ी है और पलायन की स्थिति पहले जैसी नहीं रही। रोजगार और पलायन के मुद्दे पर जवाब से असंतुष्ट होकर सपा विधायकों ने सदन से वाकआउट भी किया।

बिजली, पानी और किसानों के मुद्दे उठे

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने बजट चर्चा के दौरान पेयजल संकट और बिजली विभाग की विजिलेंस टीम को लेकर शिकायत उठाई। उन्होंने कहा कि गर्मी में पानी की समस्या बढ़ जाती है, इसलिए हैंडपंप रिबोर की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। साथ ही उन्होंने तंज करते हुए कहा कि विजिलेंस टीम की निगरानी के लिए भी अलग व्यवस्था करनी पड़ेगी। सपा विधायक आरके वर्मा ने महंगाई और किसानों की परेशानी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आलू किसान परेशान हैं जबकि बिचौलिये फायदा उठा रहे हैं।

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

सदन की शुरुआत में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने की मांग उठी। विपक्ष ने स्वास्थ्य सेवाओं की हालत पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि अस्पतालों से मरीजों को लगातार रेफर किया जा रहा है, जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। दिनभर चली बहस के बीच सरकार को कैग रिपोर्ट पेश करनी है और राष्ट्रपति के अभिभाषण को भी पारित कराया जाना है। दोपहर बाद मुख्यमंत्री के सदन को संबोधित करने की भी तैयारी रही, जिस पर सभी की नजरें टिकी रहीं।

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