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जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लगभग तैयार : 95% काम पूरा, पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता

पहले चरण में एक रनवे के साथ होगा संचालित, इस एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी में आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा, आसपास लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक क्षेत्र में आएगी तेजी

लखनऊ, 11 मार्च 2026:

यूपी के गौतमबुद्धनगर (नोएडा) जिले के जेवर में बन रहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तेजी से अपने संचालन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पहले चरण का लगभग 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार शेष कार्य 10 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद एयरपोर्ट के संचालन की तैयारी शुरू हो जाएगी।

पहले चरण में एयरपोर्ट एक रनवे के साथ संचालित होगा और इसकी वार्षिक यात्री क्षमता करीब 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। अनुमान है कि शुरुआती दौर में यहां से प्रतिदिन औसतन लगभग 150 उड़ानों का संचालन होगा। अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही यात्रियों की संख्या एक करोड़ के आंकड़े को पार करेगी वैसे दूसरे रनवे के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। दो रनवे के साथ यह एयरपोर्ट करीब 7 करोड़ यात्रियों को सेवा देने में सक्षम होगा।

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जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण में लगभग 3,300 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे हिस्से का लोकार्पण किया जाएगा। इस परियोजना के लिए अब तक कुल 6,700 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। शेष 5,100 एकड़ भूमि का अधिग्रहण अगले तीन महीनों में पूरा करने की योजना है। एयरपोर्ट के लिए भूमि खरीद पर करीब 5000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। निर्माण कार्य पर लगभग 7000 करोड़ रुपये की लागत आ रही है।

दीर्घकालिक योजना के तहत जेवर एयरपोर्ट को देश के सबसे बड़े और आधुनिक हवाई अड्डों में विकसित किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने पर यहां कुल पांच रनवे होंगे और एयरपोर्ट का क्षेत्रफल लगभग 11,750 एकड़ तक पहुंच जाएगा। अंतिम चरण में इसकी वार्षिक यात्री क्षमता 30 करोड़ यात्रियों तक होने का अनुमान है। इससे यह दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शामिल हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक क्षेत्र में तेजी आएगी जिससे बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही इसके संचालन से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

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