लखनऊ, 13 मार्च 2026:
उत्तर प्रदेश में स्थानीय कलाकारों को मंच देने के उद्देश्य से सुर साधना कार्यक्रम के तहत 22 जिलों में साप्ताहिक सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला चल रही है। इन कार्यक्रमों में प्रदेश के धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों पर कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं। करीब 156 दिनों में अब तक 374 सांस्कृतिक दलों के 2200 से अधिक कलाकार इसमें हिस्सा लेकर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। इससे प्रदेश की लोक परंपराओं को नया मंच मिला है और दर्शकों को भी विविध सांस्कृतिक रूपों को करीब से देखने का अवसर मिल रहा है।
लोकगायन, भजन, लोकनृत्य और लोकनाट्य के साथ कठपुतली, जादू, किस्सागोई और काव्य पाठ जैसी विधाएं भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं। कई स्थानों पर शास्त्रीय संगीत और वादन की प्रस्तुतियां भी हो रही हैं। इन आयोजनों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की लोक परंपराएं दर्शकों के सामने आ रही हैं।
कलाकारों को मिल रहा मानदेय
कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि क्षेत्रीय लोक कला को बढ़ावा मिल सके। कलाकारों को उनकी प्रस्तुति के अनुसार मानदेय भी दिया जा रहा है। लोक नृत्य के लिए 15 हजार रुपये, लोक भजन गायन के लिए 10 हजार रुपये और अन्य विधाओं जैसे जादू, कठपुतली, किस्सागोई और काव्य पाठ के लिए 5 हजार रुपये तय किए गए हैं। इससे कलाकारों को आर्थिक सहारा भी मिल रहा है और वे अपनी कला को बेहतर तरीके से पेश कर पा रहे हैं।

धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आयोजन
सुर साधना के कार्यक्रम प्रदेश के कई प्रमुख स्थलों पर आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें कुसुमवन सरोवर मथुरा, झांसी किला, रामघाट चित्रकूट, नया अस्सी घाट वाराणसी, त्रिवेणी घाट प्रयागराज, कुड़िया घाट और जनेश्वर मिश्र पार्क लखनऊ, शिल्पग्राम आगरा, डाइट ऑडिटोरियम बदायूं, नैमिषारण्य धाम सीतापुर, राम की पैड़ी अयोध्या, रामगढ़ताल गोरखपुर, सामौर बाबा धाम फिरोजाबाद, सीता समाहित स्थल भदोही, बटेश्वर धाम आगरा और पाल्हमेश्वरी देवी मंदिर आजमगढ़ शामिल हैं।
इसके अलावा विंध्यवासिनी देवी मंदिर मिर्जापुर, प्रेम मंदिर वृंदावन, शुक्र तीर्थ मुजफ्फरनगर, देवीपाटन मंदिर बलरामपुर, गढ़मुक्तेश्वर हापुड़, मां शाकुंभरी देवी मंदिर सहारनपुर और शीतला माता मंदिर मैनपुरी जैसे धार्मिक स्थलों पर भी नियमित कार्यक्रम हो रहे हैं।
लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने की पहल
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह का कहना है कि उत्तर प्रदेश की लोक कला और परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान हैं। सुर साधना जैसे आयोजन इन परंपराओं को नया जीवन देने का काम कर रहे हैं। इससे कलाकारों को मंच मिल रहा है और लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ पा रहे हैं। उनका कहना है कि कोशिश है कि प्रदेश के हर इलाके के कलाकारों को मौका मिले और लोक संस्कृति नई पीढ़ी तक पहुंचे।

डिजिटल मंच से भी जुड़ सकते हैं कलाकार
इच्छुक स्थानीय कलाकार UP संस्कृति ऐप के जरिए इस कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं और अपनी कला की प्रस्तुति के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस पहल का मकसद स्थानीय कलाकारों को मंच देना, सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देना और पारंपरिक लोक कलाओं को आगे बढ़ाना है। साथ ही शहर और गांव दोनों जगह के लोगों को लोक संस्कृति से जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है।






