Uttar Pradesh

हर ग्राम पंचायत में ‘बीमा सखी’: योगी सरकार का बड़ा दांव, महिलाओं को मिलेगा रोजगार व गांवों को आर्थिक संबल

प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों में लागू होगी योजना, बीसी और बैंक सखी को बीमा सखी बनने में दी जा रही प्राथमिकता, बीमा सखी को हर माह स्टाइपेंड के साथ पॉलिसी कराने पर मिलेगा कमीशन, एलआईसी और दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच हुआ एमओयू

लखनऊ, 23 मार्च 2026:

यूपी में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। एलआईसी बीमा सखी योजना के तहत अगले तीन वर्षों में प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों में एक-एक बीमा सखी तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ गांव-गांव तक बीमा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करना है।

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) की डायरेक्टर दीपा रंजन के अनुसार मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इसके लिए भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया है। योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षित कर बीमा सखी के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। ये ग्राम स्तर पर बीमा उत्पादों का प्रचार, बिक्री और सेवाएं प्रदान करेंगी।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5,000 बीमा सखियों की नियुक्ति का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक प्रदेश के 75 में से 65 जिलों से 3,397 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 672 महिलाओं ने 25 घंटे का भर्ती-पूर्व प्रशिक्षण (आईसी-38) पूरा कर लिया है। 469 अभ्यर्थियों ने आईआरडीएआई लाइसेंसिंग परीक्षा पास कर आधिकारिक रूप से बीमा सखी के रूप में कार्य शुरू कर दिया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं की लगभग 70 प्रतिशत सफलता दर इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

सरकार की योजना है कि मार्च 2026 तक अधिकतम नियुक्तियां सुनिश्चित की जाएं और शेष 10 जिलों में भी अभियान चलाकर 100 प्रतिशत कवरेज हासिल किया जाए। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर मासिक भर्ती लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। इससे प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित हो सके। योजना की निगरानी के लिए मिशन डायरेक्टर की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है। यह नियमित रूप से प्रगति की समीक्षा कर रही है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 20,000 नई बीमा सखियों की नियुक्ति का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि बीसी सखी, बैंक सखी और एफएल-सीआरपी जैसे पहले से प्रशिक्षित कैडर को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया और तेज हो सके।

बीमा सखी बनने वाली महिलाओं को पहले वर्ष 7,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड, दूसरे वर्ष 6,000 और तीसरे वर्ष 5,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इसके साथ ही बीमा पॉलिसी कराने पर उन्हें कमीशन भी मिलेगा। इससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि होगी। प्रशिक्षण के लिए एलआईसी के एजेंट ट्रेनिंग सेंटर और डिविजनल ट्रेनिंग सेंटर के सहयोग से जिला स्तर पर कैलेंडर तैयार किए जा रहे हैं। परीक्षा में असफल अभ्यर्थियों के लिए रिफ्रेशर ट्रेनिंग की भी व्यवस्था की गई है।

योजना की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसे यूपीएसआरएलएम के मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) से जोड़ा जा रहा है। इससे नियुक्ति से लेकर प्रदर्शन तक की निगरानी आसान होगी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बीमा सखियों को जिला और राज्य स्तर पर सम्मानित करने की भी योजना है।

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