Uttar Pradesh

बैंककर्मियों का वर्क-टू-रूल आंदोलन तेज, लखनऊ में काला रिबन लगाकर विरोध

पांच दिवसीय बैंकिंग पर फिर गरमाया मुद्दा, काला रिबन, काला बैज और विरोध सभाओं से दबाव बनाने की तैयारी, 6 बजे के बाद फोन नहीं उठाएंगे अधिकारी

लखनऊ, 18 अप्रैल 2026:

देशभर में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर बैंककर्मियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। लंबे समय से लंबित इस मांग पर केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय न आने से नाराज बैंक कर्मचारी अब चरणबद्ध विरोध कार्यक्रम के जरिए दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। लखनऊ में शनिवार को कर्मचारियों और अधिकारियों ने काला रिबन लगाकर विरोध दर्ज कराया।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि बैंककर्मियों ने इस मांग को लेकर पिछले कुछ महीनों में व्यापक संघर्ष किया था। 27 जनवरी को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल भी आयोजित की गई। इसके बावजूद सरकार ने पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करने पर कोई पहल नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का रवैया बैंककर्मी विरोधी है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों सहित शीर्ष प्रबंधन के लिए मनमाने तरीके से परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) लागू करने का निर्देश दिया गया है जो सुलह प्रक्रिया की अनदेखी है। इसे यूनियन ने UFBU के साथ सीधा टकराव बताया है।

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इसी के विरोध में बैंककर्मियों ने ‘वर्क-टू-रूल’ आंदोलन शुरू कर दिया है। इसके तहत कर्मचारी निर्धारित समय के अनुसार ही काम करेंगे और कोई अतिरिक्त सहयोग नहीं देंगे। सभी बैंककर्मी आधिकारिक व्हाट्सएप समूहों से बाहर हो रहे हैं और किसी भी अतिरिक्त या गैर-आवश्यक कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। अधिकारियों ने यह भी तय किया है कि वे शाम 6 बजे के बाद प्रबंधन के फोन कॉल नहीं उठाएंगे।

आंदोलन को धार देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम तय किए गए हैं। मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी के अनुसार शनिवार को कर्मचारियों और अधिकारियों ने काला रिबन लगाकर विरोध दर्ज कराया। आगामी 2 मई (प्रथम शनिवार) को काला बैज और 16 मई (तीसरे शनिवार) को काले वस्त्र पहनकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

इसके अलावा सभी शाखाओं से सीएलसी, आईबीए और डीएफएस को ज्ञापन भेजे जाएंगे। बैंक यूनियनों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले समय में हड़ताल और बड़े आंदोलन भी किए जा सकते हैं।

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