लखनऊ, 4 मई 2026:
यूपी में नौ वर्षों के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिले हैं। सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश की बिजली व्यवस्था ने गांव से लेकर शहर और उद्योगों तक नई पहचान बनाई है। 2017 से पहले जहां प्रदेश में केवल 1.28 लाख मजरों तक ही बिजली पहुंच पाई थी, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 3 लाख तक पहुंच चुका है।
सरकार ने छोटे मजरों तक भी विद्युतीकरण का लक्ष्य तय किया है और हाल ही में न्यूनतम 5 घरों वाले मजरों में भी बिजली पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। उपभोक्ताओं की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। पहले करीब 1.80 करोड़ उपभोक्ता थे। अब यह संख्या बढ़कर 3.72 करोड़ हो गई है। चार वर्षों में ही 40-45 लाख नए कनेक्शन दिए गए हैं। ‘झटपट पोर्टल’ के जरिए कनेक्शन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
बिजली आपूर्ति के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शहरों में 24 घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में 20 से 24 घंटे और दूरस्थ गांवों में भी 18 से 22 घंटे तक बिजली दी जा रही है। प्रदेश की पीक डिमांड 27,000 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यह जल्द ही 31,000 मेगावाट तक जाने की संभावना है।
वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पिछले चार वर्षों में लगभग 30 लाख बिजली खंभे बदले गए और हजारों ट्रांसफॉर्मरों का उन्नयन हुआ। प्री और पोस्ट मानसून अभियानों के चलते ट्रांसफॉर्मर क्षति में 80 प्रतिशत तक कमी आई है। इससे ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या घटी है।
स्मार्ट मीटरिंग को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में 84 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। फीडर मीटरिंग में 95 प्रतिशत प्रगति हुई है। इससे बिजली चोरी पर नियंत्रण और बिलिंग सिस्टम में पारदर्शिता आई है। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ा है। कुल उत्पादन क्षमता 55,860 मेगावाट तक पहुंच गई है।
पीएम सूर्य घर योजना के तहत 4.60 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र भी स्थापित किए जा चुके हैं। प्रदेश की बिजली व्यवस्था में हुए ये व्यापक सुधार राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करते हैं।






