Raebareli City

मायावती के दरवाजे से लौटे कांग्रेसी! ‘शिष्टाचार मुलाकात’ पर गरमाई सियासत… आई ये सफाई

राहुल गांधी के रायबरेली दौरे के दौरान लखनऊ में BSP प्रमुख से मिलने पहुंचे कांग्रेस सांसद व नेता, शुरू हुईं गठबंधन की अटकलें, कांग्रेसी बोले... सिर्फ सम्मान और हालचाल की बात

विजय पटेल

रायबरेली/लखनऊ, 20 मई 2026:

यूपी की राजनीति में बुधवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती से मिलने लखनऊ स्थित उनके आवास पहुंच गए। हालांकि यह मुलाकात हो नहीं सकी लेकिन इसके बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं और अटकलों का दौर शुरू हो गया। खासतौर पर राहुल गांधी के रायबरेली दौरे के मौके पर हुई इस कोशिश ने सियासी तापमान बढ़ा दिया।

कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया और वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम मायावती से मिलने पहुंचे थे। बताया गया कि सुरक्षा कर्मियों के माध्यम से उनका संदेश BSP प्रमुख तक पहुंचाया गया लेकिन मायावती ने मुलाकात से इनकार कर दिया। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या कांग्रेस और बसपा के बीच किसी नए समीकरण की जमीन तैयार की जा रही है।

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हालांकि कांग्रेस नेताओं ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। राजेंद्र पाल गौतम ने स्पष्ट कहा कि यह केवल शिष्टाचार मुलाकात की बात थी। उनके अनुसार रायबरेली में होने वाले एक कार्यक्रम को लेकर लखनऊ कार्यालय में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक समाप्त होने के बाद वह मायावती का हालचाल जानने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मायावती दलित समाज की बड़ी नेता हैं और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना स्वाभाविक है।

राजेंद्र गौतम ने यह भी कहा कि बसपा में रहने के दौरान उनके मायावती परिवार से पुराने संबंध रहे हैं और सामाजिक मुद्दों पर विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात होती रहती है। उन्होंने साफ किया कि वह किसी राजनीतिक गठबंधन या संदेश को लेकर नहीं गए थे।

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वहीं सांसद तनुज पुनिया ने भी मुलाकात को लेकर उठ रहे सवालों को गैरजरूरी बताया। उन्होंने कहा कि मायावती देश की प्रमुख दलित नेताओं में शामिल हैं। उनका सम्मान हर राजनीतिक दल को करना चाहिए। पुनिया ने कहा कि सामान्य शिष्टाचार भेंट को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।

फिर भी जिस तरह कांग्रेस नेताओं को मायावती से बिना मुलाकात लौटना पड़ा, उसने यूपी की राजनीति में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

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