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विराट की विजयी पारी में दिखी संयम की ताकत… बातों में झलकी प्रेमानंद महाराज की सीख

प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के कुछ सप्ताह बाद आईपीएल फाइनल में विराट कोहली ने अपनी पारी से सबको चौंकाया, जीत के बाद कहा कि खेल नहीं, सोच बदलने की जरूरत थी और बड़े मौकों पर जिम्मेदारी निभाना ही असली चुनौती होती है

न्यूज डेस्क, 1 जून 2026:

आईपीएल 2026 के फाइनल में जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को सबसे अधिक जरूरत थी, तब विराट कोहली ने अनुभव, धैर्य और परिपक्वता का शानदार परिचय देते हुए नाबाद 75 रन की मैच जिताऊ पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत आरसीबी ने गुजरात टाइटंस को हराकर दूसरी बार आईपीएल ट्रॉफी अपने नाम की। इस जीत के साथ विराट की बल्लेबाजी के अलावा उनकी बदली हुई सोच और हालिया आध्यात्मिक यात्रा भी सुर्खी बन गई है।

बता दें कि टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा के अगले ही दिन विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ वृंदावन पहुंचे थे। वहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। वर्ष 2026 में यह उनकी दूसरी वृंदावन यात्रा थी। इससे पहले जनवरी में भी दोनों परिवार सहित महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे थे।

मुलाकात के दौरान प्रेमानंद महाराज ने जीवन, सफलता और आध्यात्मिकता को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा की थीं। उन्होंने समझाया था कि वैभव और उपलब्धियां ईश्वर की विशेष कृपा नहीं बल्कि पूर्व जन्मों के पुण्यों का परिणाम होती हैं। वास्तविक परिवर्तन तब आता है जब व्यक्ति का चिंतन बदलता है और वह यश, अहंकार तथा सांसारिक आकर्षणों से ऊपर उठकर प्रभु की ओर उन्मुख होता है।

महाराज ने कहा था कि संसार में रहते हुए भी मन भगवान में लगना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया था कि सांसारिक उपलब्धियों से आगे बढ़कर जीवन के उच्च उद्देश्य की तलाश करनी चाहिए। बातचीत के दौरान अनुष्का शर्मा भी भावुक दिखाई दी थीं और उन्होंने नाम जप व आध्यात्मिक साधना को लेकर प्रश्न किए थे।

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क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि वृंदावन से लौटने के बाद विराट के व्यक्तित्व में पहले से अधिक शांति, संतुलन और आत्मविश्वास दिखाई दिया। आईपीएल फाइनल में उनकी बल्लेबाजी भी इसी मानसिक दृढ़ता का उदाहरण बनी। दबाव भरे मुकाबले में उन्होंने जल्दबाजी से बचते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और चोटिल होकर भी अंत तक विकेट पर टिके रहे।

खिताब जीतने के बाद विराट ने कहा कि अपने आईपीएल करियर का सबसे तेज अर्धशतक लगाने के बावजूद उन्हें खेल में बड़ा बदलाव करने की जरूरत महसूस नहीं हुई, बल्कि सोच बदलने की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजों को गेंदबाजों पर दबाव बनाकर अतिरिक्त रन निकालने की मानसिकता रखनी चाहिए और यही बदलाव उनके प्रदर्शन में दिखाई दिया।

उन्होंने बताया कि टीम का पहला लक्ष्य प्वाइंट टेबल में शीर्ष स्थान हासिल करना था। एक बार यह लक्ष्य पूरा हो गया तो सामने कौन-सी टीम है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। उनका कहना था कि आरसीबी सभी टीमों का सम्मान करती है और विरोधियों को उकसाने में विश्वास नहीं रखती। टीम में मौजूद अनुभवी और परिपक्व खिलाड़ियों ने बड़े मुकाबलों में अपनी भूमिका बखूबी निभाई।

विराट ने कहा कि बड़े अवसरों पर बड़े खिलाड़ियों को आगे आकर जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। उन्हें मालूम था कि लक्ष्य का पीछा करते समय विपक्षी टीम उन्हें जल्दी आउट करने की कोशिश करेगी, लेकिन उन्हें अपनी टीम की क्षमता पर पूरा भरोसा था। उनका विश्वास था कि आरसीबी की चैंपियन टीम निर्धारित लक्ष्य को समय रहते हासिल कर लेगी।

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आरसीबी के प्रशंसकों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि टीम को हर मैदान पर घरेलू माहौल मिलता है। उनके अनुसार आरसीबी के लिए सिर्फ सात नहीं बल्कि सभी 14 लीग मुकाबले घरेलू मैच जैसे होते हैं, क्योंकि प्रशंसक हर शहर में टीम के साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात टाइटंस के घरेलू मैदान पर भी बड़ी संख्या में दर्शक आरसीबी के समर्थन में मौजूद थे।

आरसीबी की ऐतिहासिक जीत के बाद विराट और अनुष्का की ट्रॉफी के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। दोनों ने टीम के खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ के साथ इस सफलता का भरपूर जश्न मनाया।

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