Uttarakhand

Power Deal पर नेता प्रतिपक्ष ने दागे सवाल, धामी से पूछा- अडानी से खरीद की जरूरत क्यों पड़ी?

अडानी पावर से 1,320 मेगावाट बिजली खरीदने के कैबिनेट फैसले पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा, 25 साल का करार सिर्फ मौजूदा सरकार का फैसला नहीं, आने वाले वर्षों की वित्तीय जिम्मेदारी से जुड़ा मामला, जलविद्युत के साथ सौर ऊर्जा की संभावनाओं का हवाला देकर बिजली खरीद समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक करने की मांग

योगेंद्र मलिक

देहरादून, 27 अगस्त 2026:

उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने अडानी पावर से 25 वर्षों के लिए 1,320 मेगावाट बिजली खरीदने के धामी कैबिनेट के फैसले पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से बातचीत में आर्य ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि उत्तराखंड को निजी कंपनी से 5.746 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी।

25 साल के करार पर मांगा हिसाब

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यशपाल आर्य ने कहा कि 25 वर्षों का Power Purchase Agreement सामान्य प्रशासनिक फैसला नहीं है। इसका असर लंबे समय तक राज्य के बजट पर पड़ सकता है। सरकार को सार्वजनिक तौर पर बताना चाहिए कि इस करार के तहत 25 वर्षों में राज्य पर कुल कितना वित्तीय भार आएगा। भविष्य में टैरिफ में बदलाव या किसी अतिरिक्त भुगतान की स्थिति में राज्य पर कितना बोझ पड़ेगा, इसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

प्राकृतिक संसाधनों को लेकर सरकार से सवाल

आर्य ने कहा कि उत्तराखंड की नदियां, जल संसाधन, पहाड़ यहां की जनता की धरोहर हैं। राज्य ने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी जलविद्युत परियोजनाओं के चलते विस्थापन से लेकर पर्यावरणीय असर तक झेला है। इसके बावजूद राज्य को बाहर से बिजली खरीदने की जरूरत क्यों पड़ रही है, सरकार को इसकी वजह साफ करनी चाहिए।

कोयला आधारित बिजली पर भी आपत्ति

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दुनिया स्वच्छ ऊर्जा की तरफ बढ़ रही है। ऐसे समय में पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील उत्तराखंड को लंबे समय तक कोयला आधारित बिजली पर निर्भर करने की नीति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने राज्य की जलविद्युत क्षमता के साथ Solar Energy समेत दूसरे Renewable Energy Sources की संभावनाओं पर भी ध्यान देने की बात कही।

बिजली खरीद की शर्तें सार्वजनिक करने की मांग

आर्य ने सरकार से Power Purchase Agreement की पूरी शर्तें सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने पूछा कि उत्तराखंड की मौजूदा जलविद्युत क्षमता का कितना इस्तेमाल हो रहा है, हर साल राज्य को कितनी बिजली बाहर से खरीदनी पड़ती है, भविष्य की जरूरतों को जलविद्युत व अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं से पूरा करने के लिए सरकार का क्या रोडमैप है। उन्होंने कहा कि इन सभी बिंदुओं पर सरकार को स्पष्ट जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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