
न्यूज डेस्क, 23 जून 2026:
क्या आपके बच्चे का पढ़ाई के दौरान बार-बार ध्यान भटक जाता है? क्या वह अक्सर चीजें भूल जाता है, एक जगह शांत बैठ नहीं पाता या जरूरत से ज्यादा सक्रिय रहता है? अगर ऐसा है तो इसे केवल शरारत या लापरवाही समझकर नजरअंदाज न करें। यह एडीएचडी (ADHD) यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है।
क्या होता है एडीएचडी?
एडीएचडी मस्तिष्क के विकास से जुड़ा एक न्यूरो डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है। इसमें व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने, अपने व्यवहार को नियंत्रित करने और लंबे समय तक किसी काम में लगे रहने में परेशानी हो सकती है। आमतौर पर इसके तीन प्रमुख लक्षण माने जाते हैं जैसे ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, अत्यधिक सक्रियता (हाइपर एक्टिविटी), आवेगपूर्ण व्यवहार (इम्पल्सिविटी) ।
हालांकि हर मरीज में ये तीनों लक्षण एक साथ दिखाई दें यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों में केवल ध्यान की समस्या होती है जबकि कुछ में अत्यधिक सक्रियता ज्यादा नजर आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते पहचान और सही उपचार मिलने पर एडीएचडी से प्रभावित बच्चे और वयस्क सामान्य व सफल जीवन जी सकते हैं।
इस उम्र में दिखाई देता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार 3 से 6 वर्ष की उम्र के बीच इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं लेकिन अधिकांश बच्चों में इसका डायग्नोज 7 से 12 वर्ष की उम्र के दौरान होता है। किशोरावस्था में भी इसके लक्षण देखने को मिले हैं। ऐसे में उनकी नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

हाल के वर्षों में एडीएचडी के मामलों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार दुनिया भर में करीब 7 प्रतिशत बच्चे और किशोर इससे प्रभावित हो सकते हैं। भारत जैसी बड़ी आबादी वाले देश में इसका मतलब है कि लाखों बच्चे इस स्थिति के साथ जीवन जी रहे हैं।
क्यों होती है ये समस्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं। परिवार में पहले किसी सदस्य का इस समस्या से ग्रसित होना, मस्तिष्क के विकास में अंतर, बचपन में लेड या अन्य जहरीले रसायनों के संपर्क में आना, समय से पहले जन्म (प्रीमैच्योर डिलीवरी) और जन्म के समय कम वजन होना। इन कारणों से एडीएचडी का जोखिम बढ़ सकता है।
न करें मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने, पर्याप्त नींद न लेने और डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता से ध्यान भटकने, चिड़चिड़ापन और व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे एडीएचडी के लक्षण और अधिक स्पष्ट या गंभीर नजर आ सकते हैं। इसलिए विशेषज्ञ स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल को न करने की सलाह देते हैं।

ऐसे में करें डॉक्टर से संपर्क
यदि बच्चा लगातार पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पा रहा है, बार-बार जरूरी बातें भूल जाता है, एक जगह बैठने में कठिनाई महसूस करता है और जरूरत से ज्यादा बेचैन या सक्रिय रहता है तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। सही समय पर जांच और सहायता मिलने से बच्चे की पढ़ाई, आत्मविश्वास और भविष्य पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
याद रखें कि एडीएचडी किसी बच्चे की बुद्धिमत्ता या क्षमता का पैमाना नहीं है। सही मार्गदर्शन, परिवार और स्कूल के सहयोग तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय उपचार से प्रभावित बच्चे अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सकते हैं।






