Uttar Pradesh

CM योगी के ‘टोंटी’ वाले तंज पर अखिलेश का पलटवार, उठाए उत्तराधिकार व परिवारवाद पर सवाल

एक्स पर लंबी पोस्ट कर सपा प्रमुख ने योगी आदित्यनाथ के अतीत, मठ की उत्तराधिकार प्रक्रिया और राजनीतिक सफर को लेकर किए तीखे सवाल, प्रदेश की राजनीति में छिड़ी जुबानी जंग

लखनऊ, 6 जून 2026:

यूपी की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘टोंटी’ वाले तंज पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई अपनी विस्तृत पोस्ट में उन्होंने योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लेते हुए कई सवाल उठाए। इससे प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विज्ञान के अनुसार किशोरावस्था में किए गए कुछ व्यवहार व्यक्ति की बोलने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि मनोविज्ञान बताता है कि बचपन और युवावस्था के अनुभव व्यक्ति की भाषा, व्यवहार और व्यक्तित्व पर गहरी छाप छोड़ते हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री की भाषा शैली पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की।

सपा प्रमुख ने योगी आदित्यनाथ के जीवन और राजनीतिक सफर का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट (योगी आदित्यनाथ) अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग करते थे। इसी आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री की भाषाई शैली पर कटाक्ष किया।

इसके साथ ही अखिलेश यादव ने गोरखनाथ मठ की उत्तराधिकार प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ को महंत अवैद्यनाथ का उत्तराधिकारी बनाए जाने की प्रक्रिया पर स्पष्टता होनी चाहिए। सपा प्रमुख ने पूछा कि क्या मठ में उत्तराधिकारी चयन के लिए कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया अपनाई गई थी या फिर रिश्तेदारी का प्रभाव भी इसमें शामिल था।

अखिलेश ने यह भी सवाल उठाया कि पहले मठ की गद्दी और फिर कुछ वर्षों बाद लोकसभा की सीट मिलने की प्रक्रिया किन आधारों पर तय हुई। उन्होंने इसे ‘पक्षपाती परिवारवाद’ से जोड़ते हुए जवाब मांगा। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने कहा कि पद और परिधान समय तथा रिश्तों की मदद से प्राप्त किए जा सकते हैं लेकिन भाषा और व्यवहार व्यक्ति के संस्कारों का प्रतिबिंब होते हैं।

अखिलेश यादव की इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। भाजपा और सपा के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव अब व्यक्तिगत और वैचारिक आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती हैं।

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