
लखनऊ/रामपुर, 18 जुलाई 2026:
सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। प्रदेश के रामपुर में अधिकारियों को लेकर विवादित बयान देने के मामले में आजम खान को शनिवार को सेशन कोर्ट से बड़ा झटका लगा। अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें आजम खान को दो साल के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। उनकी ओर से दाखिल अपील को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) ने खारिज कर दिया।
यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान का है। उस समय सपा और बसपा के बीच गठबंधन था और रामपुर लोकसभा सीट सपा के खाते में आई थी। चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान के कई बयान विवादों में रहे थे। उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के कई मुकदमे भी दर्ज हुए थे।
इसी क्रम में एक केस थाना भोट में तत्कालीन एसडीएम घनश्याम त्रिपाठी की ओर से दर्ज कराया गया था। आरोप था कि आजम खान का एक वीडियो प्रसारित हुआ, जिसमें वह एक वाहन पर खड़े होकर माइक से लोगों को संबोधित कर रहे थे। वीडियो में उनके आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
अभियोजन के अनुसार आजम खान ने अपने भाषण में कहा था- डटे रहो। कलेक्टर-फलक्टर से मत डरियो। यह तनखइया हैं। तनखइयों से नहीं डरते हैं। उन्होंने आगे तत्कालीन अधिकारियों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि उन्होंने मायावती के फोटो देखे हैं, जिसमें बड़े-बड़े अधिकारी रुमाल निकालकर जूते साफ करते हैं। आजम खान ने यह भी कहा था कि उनका गठबंधन मायावती से है और अल्लाह ने चाहा तो अधिकारियों के जूते साफ कराए जाएंगे।

इस मामले में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने गत 16 मई को आजम खान को दोषी ठहराते हुए दो साल के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आजम खान ने एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में अपील दाखिल की थी।
दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपील खारिज कर दी और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अदालत ने आजम खान की दोषसिद्धि बरकरार रखी है। वहीं, आजम खान के अधिवक्ता ने कहा कि इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।






