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श्री राम वाटिका से रामायण पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, तैयार हो रहा ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन

चित्रकूट में 11.38 करोड़ की परियोजना 50% से अधिक पूरी, ओपन-एयर एम्फीथिएटर, राम वनगमन म्यूरल्स और ईको-टूरिज्म सुविधाएं बनेंगी बड़ा आकर्षण

लखनऊ/चित्रकूट, 26 जून 2026:

रामायण सर्किट के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में शामिल चित्रकूट जल्द ही एक और भव्य पर्यटन आकर्षण से सुसज्जित होने जा रहा है। गणेशबाग क्षेत्र के बगरेही गांव के पास 11.38 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहे श्रीराम वाटिका ईको पार्क का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना का 50 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। कई प्रमुख सुविधाएं अंतिम चरण की ओर बढ़ रही हैं। इसके तैयार होने के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को प्रकृति, संस्कृति और भगवान श्रीराम की विरासत का अनूठा संगम एक ही स्थान पर देखने को मिलेगा।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि श्रीराम वाटिका ईको पार्क को पर्यटकों के लिए यादगार ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। पार्क की बाउंड्री वॉल का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं रबर फ्लोरिंग वाले आकर्षक पाथवे, पर्यटक सुविधा केंद्र, चेयर-बेंच, कलात्मक इंस्टॉलेशन और बच्चों के खेल उपकरणों का कार्य भी तेजी से उल रहा है।

इस परियोजना की सबसे खास विशेषता भगवान श्रीराम की वनगमन यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाले लाल बलुआ पत्थर के भव्य म्यूरल्स होंगे। इन कलात्मक शिल्पों के माध्यम से श्रद्धालु और पर्यटक श्रीराम के वनवास काल की यात्रा को दृश्य रूप में अनुभव कर सकेंगे।
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पार्क में कैफेटेरिया और सामूहिक बैठकों के लिए गजेबो स्पेस का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही 200 से 250 लोगों की क्षमता वाला ओपन-एयर एम्फीथिएटर भी बनाया जा रहा है। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भगवान श्रीराम के वनवास काल पर आधारित अत्याधुनिक प्रोजेक्शन मैपिंग शो आयोजित किए जाएंगे।

ये पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे। परियोजना के तहत व्यापक स्तर पर उद्यान विकास भी किया जा रहा है। इससे पूरे परिसर में हरियाली, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि श्रीराम वाटिका ईको पार्क केवल एक पर्यटन परियोजना नहीं अपितु चित्रकूट की आध्यात्मिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक गौरव को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना चित्रकूट को रामायण पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में नई पहचान दिलाने के साथ-साथ ईको और आध्यात्मिक पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

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