
योगेंद्र मलिक
देहरादून, 28 जुलाई 2026:
देहरादून की पहचान से जुड़ी दून बासमती की खुशबू एक बार फिर खेतों में लौट रही है। पिछले साल हुए ट्रायल के अच्छे नतीजों के बाद इस साल इसकी खेती का दायरा 75 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। जिले के करीब 160 किसान दून बासमती की रोपाई कर रहे हैं। प्रशासन का फोकस सिर्फ खेती का रकबा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे बीज के संरक्षण, किसानों से सीधे खरीद, Testing, Marketing और Branding पर भी काम किया जा रहा है।
ट्रायल के बाद बढ़ा किसानों का भरोसा
इस बारे में डीएम डॉ. आशीष चौहान बताते हैं कि दून बासमती को दोबारा खेतों तक लाने के लिए पिछले साल करीब 65 हेक्टेयर में इसका ट्रायल कराया गया था। इसमें 100 से ज्यादा किसान जुड़े थे। फसल के नतीजे बेहतर आने के बाद किसानों में इस पारंपरिक धान की खेती को लेकर भरोसा बढ़ा है। इस साल खेती का क्षेत्र 75 हेक्टेयर कर दिया गया है। सहसपुर, विकासनगर के बाद रायपुर व डोईवाला ब्लॉक के किसान भी इसकी खेती में रुचि दिखा रहे हैं। मौजूदा समय में जिले के करीब 160 किसान दून बासमती की रोपाई कर रहे हैं।
200 क्विंटल से ज्यादा धान की हुई खरीद
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि वर्ष 2025 में हुए ट्रायल के दौरान किसानों को उनकी फसल का बाजार उपलब्ध कराने पर भी काम किया गया। ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना REAP के जरिए किसानों से दून बासमती धान की सीधे खरीद की गई। पिछले साल 200 क्विंटल से ज्यादा धान 65 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा गया। इससे किसानों के खातों में 13 लाख रुपये से ज्यादा सीधे ट्रांसफर किए गए। इस बार भी किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम दिलाने के लिए REAP व Hilans के जरिए Marketing पर फोकस किया जा रहा है।

विकासनगर में बनेगा दून बासमती का Seed Bank
दून बासमती के अच्छे बीज को सुरक्षित रखने के लिए विकासनगर में Seed Bank बनाने की तैयारी है। इसका मकसद किसानों को आगे चलकर बेहतर गुणवत्ता वाला बीज आसानी से उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही विकासनगर में दून बासमती की Testing Facility विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। प्रशासन का मानना है कि फसल की गुणवत्ता, सुगंध व स्थानीय पहचान को बनाए रखने के लिए बीज संरक्षण के साथ वैज्ञानिक जांच भी जरूरी है।
कभी 550 हेक्टेयर में होती थी खेती
मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह के मुताबिक एक समय देहरादून में दून बासमती की खेती करीब 550 हेक्टेयर में होती थी। धीरे-धीरे इसका रकबा घटता गया और यह करीब 150 से 200 हेक्टेयर तक सिमट गया। अब कृषि विभाग व ग्रामोत्थान के सहयोग से इस पारंपरिक धान की खेती को फिर बड़े स्तर पर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अच्छे बीज को सुरक्षित रखने पर भी काम हो रहा है, ताकि किसानों को आने वाले समय में गुणवत्ता वाला बीज मिल सके।
हरबर्टपुर के किसानों को भी दिख रही उम्मीद
हरबर्टपुर के किसान सूर्य प्रकाश बहुगुणा के मुताबिक उनके क्षेत्र में करीब 25 से 30 किसान दून बासमती के पुनर्जीवन अभियान से जुड़े हैं। किसानों को जिला प्रशासन, कृषि विभाग व ग्रामोत्थान की तरफ से खेती से जुड़े काम में सहयोग मिल रहा है। किसानों का कहना है कि अगर दून बासमती की खरीद के लिए बाजार लगातार मिलता रहा तो इसका रकबा आगे और बढ़ सकता है। इससे इस पारंपरिक धान की खेती से जुड़े किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।
बीज से Branding तक बढ़ाया जा रहा फोकस
दून बासमती को फिर बाजार में मजबूत पहचान दिलाने के लिए खेती के विस्तार के साथ Seed Bank, Testing, Direct Procurement, Marketing व Branding पर काम किया जा रहा है। पिछले साल का ट्रायल इसी कड़ी में अहम रहा, जिसके बाद इस साल खेती का क्षेत्र 75 हेक्टेयर तक बढ़ा है। जिला प्रशासन, कृषि विभाग व ग्रामोत्थान की कोशिश है कि दून बासमती की खास सुगंध व गुणवत्ता को बनाए रखते हुए इसे देहरादून की पारंपरिक पहचान के तौर पर बाजार तक पहुंचाया जाए।






