Uttarakhand

ग्लेशियर झीलों का जमीन से लेकर गहराई तक होगा सर्वे, सरस्वती ताल-केदारताल को एक्सपर्ट टीम रवाना

सरस्वती ताल की करीब 5700 मीटर ऊंचाई पर होगी जांच, केदारताल 4750 मीटर पर स्थित, दोनों झीलों की गहराई, जलस्तर व संभावित खतरे का होगा वैज्ञानिक आकलन, डाउनस्ट्रीम इलाकों पर असर की भी होगी पड़ताल

देहरादून, 9 सितंबर 2026:

उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से जुड़े संभावित खतरे को कम करने की तैयारी के बीच चमोली की सरस्वती ताल व उत्तरकाशी की केदारताल के सर्वे के लिए विशेषज्ञ दल रवाना हो गया। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) से सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने दल को हरी झंडी दिखाई। सीएम धामी व आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने विशेषज्ञों को शुभकामनाएं दीं। इस सर्वे के जरिए दोनों झीलों की मौजूदा स्थिति के साथ भविष्य में बनने वाले जोखिम का भी आकलन किया जाएगा।

13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील श्रेणी में

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक उत्तराखंड में 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें चार झीलों का सर्वे पहले ही कराया जा चुका है। बाकी झीलों की जांच भी चरणबद्ध तरीके से की जा रही है। सरस्वती ताल व केदारताल का इस चरण में बैथीमेट्री सर्वे किया जाएगा। इसमें झील की गहराई, जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भू-भाग की स्थिति समेत संभावित खतरे के कारणों की जांच होगी।

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डाउनस्ट्रीम इलाकों का भी आकलन

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सर्वे का एक अहम हिस्सा दोनों झीलों से नीचे की ओर आने वाले इलाकों पर संभावित असर का पता लगाना है। विशेषज्ञ यह देखेंगे कि किसी आपदा की स्थिति में पानी का बहाव किन क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। इसके आधार पर संभावित प्रभावित इलाकों की पहचान, सुरक्षित निकासी मार्ग व राहत-बचाव की तैयारी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

सेंसर से लेकर चेतावनी तंत्र तक तैयारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन कर उनकी मौजूदा स्थिति को समझा जा रहा है। संभावित खतरे की स्थिति में समय रहते सूचना पहुंचाने के लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण, संचार प्रणाली सहित जरूरी तकनीकी संसाधनों पर भी फोकस किया जा रहा है।

ऊंचाई पर कठिन होगा सर्वे

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सरस्वती ताल करीब 5700 मीटर की ऊंचाई पर है, जबकि केदारताल लगभग 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। बेहद ऊंचाई वाले इन क्षेत्रों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा।

कई संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल

अभियान में USDMA, उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर (ULMMC), वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी (NIH) रुड़की, SDRF, NDRF व नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा लखनऊ स्थित बाबा साहनी पुराविज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों को भी दल में शामिल किया गया है। संस्थान के नाम की मूल प्रेस सामग्री में यही वर्तनी दी गई है।
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सर्वे दल में शामिल हैं ये विशेषज्ञ

दल में USDMA से रोहित कुमार व निखिल पुनिया, ULMMC से डॉ. विशाल व दीपक भट्ट, BSIP से डॉ. शेख नवाज अली, शुभजीत घोष व प्रकाश रंजन जेना, वाडिया संस्थान से डॉ. पिंकी बिष्ट, स्वप्निल बिष्ट व शिव्यांक सिंह नेगी शामिल हैं। NIH रुड़की से शिव शंकर यादव व डॉ. शिवानंद मंडराहा, SDRF से नितेश खेतवाल व संदीप सिंह, NDRF गदरपुर से सचिन कुमार व मनीष कुमार भी अभियान का हिस्सा हैं। चमोली जिले से महेंद्र व मनोज सिंह, उत्तरकाशी से डीडीएमओ शार्दुल गुसाईं व इंजीनियर नरेंद्र सिंह रावत दल में शामिल हैं।

आपदा तैयारी पर रहेगा जोर

आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक ग्लेशियर झीलों से जुड़े जोखिम को कम करने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। इन इलाकों में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्र, स्थानीय warning system, संचार व्यवस्था व राहत-बचाव की तैयारी को मजबूत करने पर काम किया जाएगा। इस मौके पर एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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