
लखनऊ, 20 अगस्त 2026:
दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी जेन-जी की आवाज अब स्कूलों की चौखट से होते हुए सड़कों तक पहुंच गई है। यूपी के कई जिलों में स्कूली बच्चे यानी जेन-अल्फा पढ़ाई की बदहाल व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। बच्चों के इस बढ़ते आक्रोश के बीच बसपा सुप्रीमो एवं पूर्व सीएम मायावती ने सरकारों को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग से बचें।
मायावती ने गुरुवार को एक्स पर एक लंबे पोस्ट में कहा कि वर्ष 2013 के बाद जन्मी जेन-अल्फा पीढ़ी बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ अच्छी शिक्षा चाहती है। लेकिन देशभर और खासकर यूपी व उत्तर भारत के राज्यों में स्कूलों की बदतर जमीनी स्थिति ने बच्चों और उनके अभिभावकों को मुखर होने के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि ये बच्चे जेन-जी के देशव्यापी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में भी उत्साह से हिस्सा ले रहे हैं।
बसपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि जिन बच्चों के हंसने-खेलने और पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें आखिर स्कूल में पढ़ाई के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की मांग लेकर सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है? उन्होंने इसे बेहद दुखद और चिंताजनक स्थिति करार दिया।
मायावती ने अपने बयान में शिक्षा के सवाल को बहुजन समाज से भी जोड़ते हुए बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के ‘शिक्षित बनो’ आह्वान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बसपा की सरकारों में वंचित और शोषित वर्गों के हित, शिक्षा और आत्मसम्मान को प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के बजाय अलग-अलग सरकारों ने उनकी अनदेखी की और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का सिलसिला जारी रहा। मायावती ने यह भी दावा किया कि बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं और बसपा इसका लगातार विरोध करती रही है।
अब जेन-अल्फा के आंदोलन को उन्होंने इसी बदहाली का नतीजा बताते हुए सरकारों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर आंदोलित बच्चों की मांगों पर सहानुभूति, सही नीयत और ठोस नीति के साथ कार्रवाई करने की अपील की।
मायावती का संदेश साफ है- स्कूलों की बदहाली पर सवाल उठाने वाले बच्चों को दबाने के बजाय व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। उन्होंने यूपी समेत सभी राज्य सरकारों से जेन-अल्फा के खिलाफ किसी भी तरह के बल प्रयोग से पूरी तरह बचने को कहा है।






