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गोरखनाथ सर्किट से बदलेगा बुंदेलखंड का नक्शा! महोबा का गोरखगिरि बना आध्यात्मिक टूरिज्म का नया हब

11.21 करोड़ की परियोजना पूरी, शिव तांडव मंदिर से ओपन थिएटर तक आधुनिक सुविधाएं, लाखों पर्यटकों की आमद से रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट

लखनऊ/महोबा/गोरखपुर, 20 अप्रैल 2026:

यूपी में आध्यात्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए योगी सरकार अब गुरु गोरखनाथ सर्किट पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में बुंदेलखंड के महोबा स्थित गोरखगिरि पर्वत को विकसित कर इसे आध्यात्मिक पर्यटन का उभरता हुआ केंद्र बना दिया गया है। स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत करीब 11.21 करोड़ रुपये की लागत से यहां पर्यटन विकास कार्य पूरे कर लिए गए हैं।

प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक विकास भी, विरासत भी के विजन के साथ तैयार यह परियोजना पीएम मोदी की परिकल्पना और सीएम योगी के मार्गदर्शन में साकार हुई है। इसका मकसद न सिर्फ श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं देना है बल्कि गुरु गोरखनाथ से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल को वैश्विक पहचान दिलाना भी है। आंकड़े इसकी सफलता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। साल 2025 में ही महोबा में करीब 28 लाख पर्यटक पहुंचे।

गोरखगिरि में पर्यटन का नया अध्याय लिखते हुए शिव तांडव मंदिर और गोरखगिरि मंदिर का व्यापक कायाकल्प किया गया है। परिसर में आधुनिक शौचालय, पर्यटक सुविधा केंद्र और वेंडर कियोस्क विकसित किए गए हैं। इससे स्थानीय लोगों को सीधे रोजगार से जोड़ा जा सके। इसके अलावा ध्यान केंद्र और ओपन थिएटर जैसी सुविधाएं इस स्थल को धार्मिक के साथ सांस्कृतिक हब भी बना रही हैं। आकर्षक प्रवेश द्वार और सुव्यवस्थित मार्गों ने पूरे क्षेत्र में आवागमन को बेहद आसान बना दिया है।

यह परियोजना पर्यटन के साथ बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने का माध्यम भी बन रही है। स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को अपने उत्पाद बेचने का मंच मिलेगा। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही पर्यटकों की बढ़ती संख्या से होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

गोरखगिरि पर्वत की आध्यात्मिक महत्ता भी इसे खास बनाती है। मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने वनवास के दौरान यहां समय बिताया था। बाद में यह स्थल गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात के अनुसार यह परियोजना प्रदेश सरकार की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है जो विरासत संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को नई दिशा दे रही है। गोरखगिरि अब बुंदेलखंड के साथ पूरे देश के आध्यात्मिक मानचित्र पर तेजी से उभरता हुआ नाम बन चुका है।

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