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‘इबोला’ को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट…लखनऊ के लोकबंधु अस्पताल में बना आइसोलेशन वार्ड

भारत में फिलहाल 'इबोला' वायरस का कोई मामला नहीं, यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री और स्वास्थ्य की होगी जांच, संक्रमण नियंत्रण संबंधी व्यवस्थाएं होंगी मजबूत

लखनऊ, 4 जून 2026:

कोरोना महामारी की भयावह यादें अभी लोगों के जेहन से पूरी तरह मिट भी नहीं पाई हैं कि अब इबोला वायरस ने दुनियाभर में नई चिंता पैदा कर दी है। अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में संक्रमण के मामलों में तेजी आने के बाद भारत में भी स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। यूपी की राजधानी लखनऊ में संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। लोकबंधु अस्पताल में इबोला मरीजों के लिए छह बेड का विशेष वार्ड भी रिजर्व कर दिया गया है

मेडिकल संसाधन तैयार रखने के निर्देश

वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।संभावित मरीजों के इलाज और आइसोलेशन के लिए लोकबंधु अस्पताल में छह बेड आरक्षित किए गए हैं। अस्पताल प्रशासन को पीपीई किट, एन 95 मास्क, जरूरी दवाइयां और अन्य मेडिकल संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों से संक्रमण नियंत्रण संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत करने को कहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

एयरपोर्ट पर विशेष निगरानी

बताया जा रहा है कि इबोला संक्रमण की आशंका को देखते हुए एयरपोर्ट पर विशेष स्वास्थ्य टीम तैनात की गई है। विदेश से आने वाले यात्रियों के ट्रैवल हिस्ट्री और स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति में लक्षण मिलने पर तुरंत सैंपलिंग और मेडिकल निगरानी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। भारत में फिलहाल इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है।

कितना खतरनाक है इबोला वायरस?

इबोला वायरस शरीर को तेजी से कमजोर कर देता है और गंभीर स्थिति में जानलेवा भी साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल फीवर जैसे दिखाई देते हैं जिससे कई बार समय पर पहचान मुश्किल हो जाती है। संक्रमित व्यक्ति में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, गले में खराश और भूख कम लगने जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। बीमारी बढ़ने पर मरीज को उल्टी-दस्त, पेट दर्द, डिहाइड्रेशन और त्वचा पर रैशेज की शिकायत हो सकती है।

गंभीर मामलों में शरीर के अलग-अलग हिस्सों से ब्लीडिंग यानी खून बहने की स्थिति भी बन सकती है। मरीज के नाक, मसूड़ों, उल्टी या मल में खून आने जैसे लक्षण संक्रमण के खतरनाक स्तर की ओर इशारा करते हैं।

कैसे फैलता है इबोला?

विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला कोरोना वायरस की तरह हवा से नहीं फैलता और न ही मच्छरों के काटने से संक्रमण होता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून या शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है। खून, पसीना, लार, उल्टी, मल, पेशाब या अन्य बॉडी फ्लूइड्स के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है। संक्रमित मरीज के इस्तेमाल किए गए कपड़े, बिस्तर, तौलिया या मेडिकल उपकरणों को बिना सुरक्षा के छूने से भी खतरा बढ़ जाता है।

घबराएं नहीं लेकिन रहें सतर्क

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता और सावधानी ही इस तरह के संक्रमण से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सही समय पर पहचान, सख्त निगरानी और अस्पतालों की तैयारी से इबोला के फैलाव को रोका जा सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है लेकिन प्रशासन किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का दावा कर रहा है।

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