लखनऊ, 4 जून 2026:
यूपी में सरकारी पक्ष को कोर्ट में अधिक प्रभावी तथा मजबूत बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विभिन्न स्तरों पर कार्यरत सरकारी अधिवक्ताओं के मानदेय (रिटेनरशिप फीस) और प्रति सुनवाई मिलने वाली बहस फीस में उल्लेखनीय वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस निर्णय से उप जिला शासकीय अधिवक्ता से लेकर महाधिवक्ता तक हजारों विधि अधिकारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार का मानना है कि लंबे समय से लंबित इस मांग को पूरा करने से न केवल योग्य और अनुभवी अधिवक्ता सरकारी पक्ष रखने के लिए आकर्षित होंगे बल्कि न्यायिक मामलों के प्रभावी निस्तारण और पैरवी में भी तेजी आएगी। वर्तमान में अधिकांश विधि अधिकारियों को 10 से 15 वर्ष पूर्व जारी शासनादेशों के आधार पर मानदेय दिया जा रहा था। इसे समय के अनुरूप संशोधित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार जिला शासकीय अधिवक्ता की मासिक रिटेनरशिप फीस 9 हजार रुपये से बढ़ाकर 14 हजार रुपये कर दी गई है, जबकि प्रति कार्यदिवस बहस शुल्क 1650 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार अपर जिला शासकीय अधिवक्ता को अब 11 हजार रुपये मासिक रिटेनरशिप और 2300 रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क मिलेगा।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता की रिटेनरशिप 10 हजार रुपये तथा बहस शुल्क 2300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित किया गया है। वहीं उप जिला शासकीय अधिवक्ता को अब 9 हजार रुपये मासिक रिटेनरशिप और 2000 रुपये प्रति कार्यदिवस बहस शुल्क मिलेगा। विशेष अधिवक्ताओं, न्याय मित्रों और नामिका वकीलों के लिए भी बहस शुल्क 2300 रुपये प्रति कार्यदिवस तय किया गया है।
उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय स्तर पर भी मानदेय में बड़ा इजाफा किया गया है। महाधिवक्ता को अब 1.25 लाख रुपये प्रतिमाह रिटेनरशिप तथा 60 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क मिलेगा। अपर महाधिवक्ता (उच्च न्यायालय) को 50 हजार रुपये मासिक रिटेनरशिप और 40 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क दिया जाएगा। वहीं अपर महाधिवक्ता (उच्चतम न्यायालय) को 50 हजार रुपये प्रतिमाह रिटेनरशिप तथा 50 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क मिलेगा।
इसके अलावा मुख्य स्थायी अधिवक्ता को 35 हजार रुपये मासिक रिटेनरशिप और 12 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क निर्धारित किया गया है। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता, अपर शासकीय अधिवक्ता और अपर लोक अभियोजकों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह रिटेनरशिप तथा 8 हजार रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क मिलेगा। सरकार के इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और सरकारी मुकदमों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






